हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की सैंज घाटी में शनिवार देर रात एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-II के एडिट-5 से अचानक पानी के रिसाव के बाद पालचरा गांव में अफरातफरी मच गई। पानी के तेज बहाव के साथ परियोजना क्षेत्र में जमा मलबा भी नीचे की ओर बहकर रिहायशी इलाके तक पहुंच गया, जिससे कई घरों, दुकानों, होमस्टे और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की सूचना है।
घटना रात करीब 11 बजे के आसपास हुई। अचानक पानी और मलबे का बहाव गांव की ओर बढ़ने से ग्रामीणों को संभलने का ज्यादा समय नहीं मिला। कई परिवारों को रात में अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ प्रभावित परिवारों ने रिश्तेदारों और आसपास के लोगों के घरों में रात बिताई। करीब 15 परिवारों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक पानी के बहाव से दो मकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि अन्य मकानों, दुकानों और अस्थायी व्यावसायिक ढांचों में भी पानी और मलबा घुस गया। कृषि भूमि और गांव के रास्ते भी प्रभावित हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में होमस्टे और कैफे समेत अन्य स्थानीय संपत्तियों को नुकसान की बात कही गई है। हालांकि, नुकसान की अंतिम तस्वीर विस्तृत प्रशासनिक आकलन के बाद ही स्पष्ट होगी।
घटना को लेकर ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पानी के साथ डंपिंग साइट का मलबा नीचे आने से नुकसान और बढ़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण करवाने, नुकसान का निष्पक्ष आकलन करने तथा भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और परियोजना अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन के अनुसार रिसाव को रोक दिया गया है और जमा हुए मलबे को हटाने के लिए मशीनरी मौके पर लगाई गई है। प्रभावित क्षेत्र की निगरानी भी की जा रही है। अधिकारियों को स्थानीय लोगों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने और नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की है। समिति यह भी देखेगी कि रिसाव की वजह क्या रही और परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था तथा निर्धारित मानक प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं। एनएचपीसी से भी घटना के कारणों और परिस्थितियों पर रिपोर्ट मांगी गई है।
फिलहाल किसी मानवीय क्षति की सूचना नहीं है, लेकिन आधी रात को अचानक पानी और मलबे के गांव में पहुंचने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पार्वती जल विद्युत परियोजना जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रकल्पों के आसपास बसे गांवों के लिए ऐसी घटनाएं केवल तत्काल नुकसान का सवाल नहीं हैं, बल्कि परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा, डंपिंग साइटों के प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जरूरत भी सामने लाती हैं।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच और नुकसान के विस्तृत आकलन पर है। प्रभावित परिवारों को हुए वास्तविक नुकसान का आंकड़ा सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राहत और मुआवजे की जरूरत कितनी व्यापक है। प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के सामने तत्काल चुनौती प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह भरोसा कायम करना है कि भविष्य में परियोजना क्षेत्र से पानी या मलबे का अचानक बहाव आबादी के लिए खतरा न बने।
जल्दी नुकसान का आकलन कर के उसका सही भुगतान होगा ऐसी उम्मीद है,
जहां भी डैम बने हैं या पानी से बिजली बनाई जा रही है, इन स्थानों में ऐसी समस्याएं अक्सर देखने को मिलती है,
प्रबंधन समय समय पर लोगों को जागरूक करता रहता है,





