शिमला/सोलन, 6 अक्टूबर — डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में कुलसचिव को लेकर चल रहे प्रशासनिक विवाद में प्रदेश सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए कार्यवाहक कुलपति डॉ. एचएस बवेजा का आदेश रद्द कर दिया है। कुलपति ने 5 अक्टूबर को एचएएस अधिकारी और रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां वापस लेते हुए डॉ. डीपी शर्मा को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था। सरकार ने अगले ही दिन इस आदेश को निष्प्रभावी कर सिद्धार्थ आचार्य को उनके पद और अधिकारों पर बहाल कर दिया।

बागवानी विभाग के सचिव सी. पाल रासू की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार एक वैधानिक पद है और उसकी नियुक्ति से संबंधित अधिकार कानून के तहत राज्य सरकार के पास हैं। सरकार ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कुलपति की आपात शक्तियों का इस्तेमाल किसी वैधानिक पद पर नियुक्त अधिकारी को हटाने या उसके स्थान पर दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने के लिए नहीं किया जा सकता।
सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि कुलपति के आदेश के बाद यदि रजिस्ट्रार कार्यालय की कोई फाइल, रिकॉर्ड, रजिस्टर, मुहर, चाबी या अन्य सरकारी संपत्ति किसी दूसरे अधिकारी को सौंपी गई है तो उसे सिद्धार्थ आचार्य को वापस किया जाए। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय में चल रहे प्रशासनिक और अकादमिक तनाव को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इससे पहले परिसर में शिक्षकों और कुलपति के बीच विवाद के बाद पुलिस की मौजूदगी तक की स्थिति बनी थी।





