तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थी गर्भवती महिला, उपचार में लापरवाही के आरोपों की जांच शुरू; पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में शुक्रवार सुबह प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला सामने आया है। इस दुखद घटना के बाद अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में परिजनों ने जमकर हंगामा किया और उपचार में कथित लापरवाही को लेकर चिकित्सकों पर सवाल उठाए। आक्रोशित परिजनों ने संबंधित डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।

प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतका की पहचान 33 वर्षीय रीना देवी, निवासी अपर अरनियाला, के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह करीब तीन दिन से उपचाराधीन थीं। शुक्रवार सुबह प्रसव पीड़ा बढ़ने पर उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र के ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को नहीं बचाया जा सका।
मौत के बाद अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल
महिला और शिशु की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने उपचार के दौरान बरती गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित चिकित्सकीय देखभाल की जाती, तो शायद इस दुखद स्थिति से बचा जा सकता था। परिजनों ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत करने का प्रयास किया। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी मौत की वजह
इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। इन सवालों का जवाब संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार के समयक्रम और विशेषज्ञों की जांच से ही सामने आ सकेगा।
प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की है। हालांकि, परिजनों की ओर से लगाए गए चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। केवल मौत होने के आधार पर किसी चिकित्सक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता; जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर उठे सवाल
सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाएं महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में उपचार के दौरान हुई प्रत्येक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय कार्रवाई, मरीज की स्थिति में आए बदलाव और आपातकालीन प्रबंधन की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी होती है।
इस मामले में भी परिजनों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच, मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाना आवश्यक है। साथ ही, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित प्रशासन को जांच की स्थिति तथा आगे की कार्रवाई के बारे में परिवार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
फिलहाल, इस दुखद घटना के कारणों और कथित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। परिजनों की मांग है कि मामले में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।





