उत्तराखंड में हिमाचल रोडवेज की बस गहरी खाई में गिरी, 30 से अधिक यात्री सवार; युद्धस्तर पर राहत-बचाव

उत्तराखंड के देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र में क्वाणु–मीनस मार्ग पर मंगलवार को हिमाचल पथ परिवहन निगम की एक बस दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरी। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में बस में 30 से अधिक यात्रियों के सवार होने की बात सामने आई है। दुर्घटना दूरस्थ और पहाड़ी इलाके में होने के कारण राहत-बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यादववंशी के निर्देश पर डाकपत्थर, चकराता, मोरी और त्यूणी पोस्ट से टीमें तत्काल मौके के लिए रवाना की गईं। जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय एजेंसियों के सहयोग से यात्रियों को सुरक्षित निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। खाई की गहराई और दुर्गम भूभाग को देखते हुए विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की मदद ली जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए जिला मजिस्ट्रेट से फोन पर बात की और सभी आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि राहत-बचाव में किसी तरह की देरी न हो और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मिले। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आसपास के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर उन्नत चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराने की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन के अनुसार, मौके पर राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है, जबकि यात्रियों और उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

इधर, एक अलग घटना में रविवार को तमिलनाडु के अरियालुर जिले में तिरुचि-चिदंबरम राष्ट्रीय राजमार्ग पर समयापुरम मरिअम्मन मंदिर के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की वैन पलट गई। यह हादसा पोय्यूर गांव के पास हुआ, जहां सूचना मिलते ही कीझापाझुवूर पुलिस मौके पर पहुंची, मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

दोनों घटनाएं सड़क सुरक्षा और पहाड़ी व राजमार्गीय क्षेत्रों में सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि घायलों के उपचार और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।