भारत में लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व की एक और महत्वपूर्ण कड़ी जल्द शुरू होने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार इन पांचों राज्यों में मतदान अप्रैल माह के दौरान अलग-अलग चरणों में कराया जा सकता है, जबकि चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा मार्च के मध्य में होने की संभावना है।
निर्वाचन आयोग की टीमें इन दिनों चुनाव संभावित राज्यों का दौरा कर रही हैं। इन दौरों का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की तैयारियों, ईवीएम और वीवीपैट की उपलब्धता, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान तथा प्रशासनिक समन्वय की समीक्षा करना है। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रत्येक मतदाता को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का अनुभव मिले।
चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का आधार सटीक मतदाता सूची होती है। इसी क्रम में राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया है। फरवरी के दौरान अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जा रही है, जिससे नए मतदाताओं का पंजीकरण, नामों का संशोधन और त्रुटियों का निराकरण सुनिश्चित हो सके।
युवा मतदाताओं, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वाले नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक भागीदारी को व्यापक बनाया जा सके।
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन इन चुनावों का राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में मतदाताओं की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी निर्णायक साबित होगी।
निर्वाचन आयोग लगातार मतदाता जागरूकता कार्यक्रम (SVEEP) के माध्यम से लोगों को मतदान के महत्व के प्रति प्रेरित कर रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि मतदान प्रतिशत में वृद्धि हो सके।
भारत निर्वाचन आयोग का लक्ष्य केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। इसके लिए केंद्रीय बलों की तैनाती, आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और खर्च की निगरानी जैसे कदम उठाए जाएंगे।
विशेष रूप से संवेदनशील और अति-संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा की संभावना को रोका जा सके।
इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव न केवल स्थानीय सरकारों के गठन का मार्ग प्रशस्त करेंगे, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः पुष्टि भी होंगे। चुनाव आयोग की तैयारियां और मतदाताओं की भागीदारी मिलकर भारत के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगी।
अब सबकी नजरें मार्च के मध्य में होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसके साथ ही चुनावी सरगर्मियां पूरे देश में तेज हो जाएंगी।





