नारकंडा में अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़: 9.28 किलो अफीम और 12 लाख की नकदी बरामद, तीन नेपाली नागरिक गिरफ्तार

शिमला जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। नारकंडा क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान एक कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने भारी मात्रा में अफीम और नकदी बरामद की है। इस कार्रवाई ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या और उसके पीछे सक्रिय संगठित गिरोहों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामपुर की डिटेक्शन सेल को एक गुप्त सूचना मिली थी कि नेपाली मूल के कुछ लोग बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ लेकर राज्य में प्रवेश कर रहे हैं और उनका गंतव्य शिमला क्षेत्र हो सकता है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत रणनीति बनाते हुए नारकंडा में नाकाबंदी कर दी और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू कर दी।

इसी दौरान एक इनोवा कार पुलिस के संदेह के घेरे में आई, जिसे रोककर स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान जो बरामदगी हुई, उसने पुलिस टीम को भी चौंका दिया। वाहन से 9.28 किलोग्राम अफीम और करीब 12 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में यह नकदी ड्रग तस्करी से जुड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मादक पदार्थ और नकदी को जब्त कर लिया तथा NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान एन. बहादुर उर्फ राजू (41), चक्रा बहादुर (25) और मोहन साही (44) के रूप में हुई है, जो नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी बताए जा रहे हैं।

आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तस्करी के पीछे कौन-कौन से बड़े गिरोह सक्रिय हैं और इसका अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कनेक्शन है।

हिमाचल प्रदेश, जिसे लंबे समय तक शांत और सुरक्षित राज्य के रूप में देखा जाता रहा है, पिछले कुछ वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन के मामलों में तेजी से वृद्धि का सामना कर रहा है। पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति और बाहरी राज्यों व सीमावर्ती क्षेत्रों से संपर्क तस्करों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। ऐसे में पुलिस और अन्य एजेंसियों के लिए यह चुनौती और भी जटिल हो जाती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हालिया कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही जीती जा सकती है। यदि समय रहते इस पर कड़ा नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।