मंडी में कंडक्टर पिटाई मामला बना सियासी मुद्दा
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंद्रनगर में एचआरटीसी कंडक्टर के साथ हुई मारपीट की घटना अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा चर्चा का विषय बनती जा रही है। इस घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में जुटे हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब खुड्डी से जोगिंद्रनगर जा रही एचआरटीसी बस को रास्ते में खड़ी एक स्कूटी के कारण आगे बढ़ने में दिक्कत आ रही थी। कंडक्टर ने स्कूटी चालक से वाहन हटाने का अनुरोध किया, लेकिन बात यहीं से बिगड़ गई। आरोप है कि स्कूटी सवार युवक ने पहले कंडक्टर के साथ बहस और गाली-गलौज की, और फिर स्थिति को हिंसक रूप दे दिया।
बताया जा रहा है कि युवक ने अपने साथियों को फोन कर मौके पर बुलाया, जिनमें कुछ लोग जिम से जुड़े बताए जा रहे हैं। कुछ ही देर में पहुंचे इन युवकों ने कथित तौर पर कंडक्टर पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह पीटा। इस हमले में कंडक्टर गंभीर रूप से घायल हो गया और खून से लथपथ हो गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
इस पूरे प्रकरण में स्थानीय भाजपा विधायक Prakash Rana के वाहन चालक के बेटे का नाम सामने आने से मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन इस कड़ी ने विपक्ष को सरकार और सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।
घटना के बाद एचआरटीसी कर्मचारियों में भारी रोष देखा गया। कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप संबंधित रूट पर बस सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया और चेतावनी दी कि यदि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह घटना मंडी जिले ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि जो दल लगातार कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर हमलावर रहता है, उसी से जुड़े लोगों के नाम ऐसे मामलों में सामने आना क्या संकेत देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहतीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव को भी प्रभावित करती हैं। एक ओर जहां भाजपा प्रदेश में कांग्रेस सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं इस घटना ने सत्तापक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई होती है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति पर हमले का मामला नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।
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