पालमपुर,
हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कांगड़ा चाय को वैश्विक पहचान दिलाने और माचा (Matcha) चाय उत्पादन की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) इंडिया का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पालमपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (HPCDP-Phase II) के तहत संचालित गतिविधियों का जायजा लिया तथा चाय आधारित आजीविका, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण कृषि उद्यमिता से जुड़े विभिन्न मॉडल का अध्ययन किया।
जाईका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ प्रतिनिधि कोइडे सोता, प्रतिनिधि ताइको इवामोटो तथा विकास विशेषज्ञ निष्ठां वेंगुरलेकर शामिल रहे। यह दौरा तीन दिवसीय अध्ययन मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कांगड़ा घाटी में चाय क्षेत्र के विकास, मूल्य संवर्धन और उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधियों की संभावनाओं का आकलन करना है।
प्रतिनिधिमंडल के साथ एचपीसीडीपी (फेज-II) के परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान, उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश गखड़, जिला परियोजना प्रबंधक पालमपुर डॉ. योगिंदर पॉल कौशल, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. आशीष आनंद, डॉ. राकेश शर्मा तथा बीपीएम पालमपुर डॉ. अमित भूषण भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मिशन को परियोजना की उपलब्धियों और कांगड़ा क्षेत्र में चाय उद्योग से जुड़ी उभरती संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
मिशन का पहला पड़ाव रायपुर स्थित हिमालयन ब्रू टी एस्टेट रहा, जहां प्रतिनिधिमंडल ने चाय उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य हितधारकों के साथ संवाद किया। इस दौरान आधुनिक उत्पादन तकनीकों, प्रसंस्करण व्यवस्था, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन तथा माचा चाय उत्पादन के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कांगड़ा चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने पालमपुर सहकारी चाय फैक्ट्री का दौरा किया और चाय उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ बैठक की। इस दौरान चाय मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने, सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।
दियोग्रां स्थित वाह टी एस्टेट में प्रतिनिधिमंडल ने उन्नत चाय उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रणालियों का अवलोकन किया। यहां हिमाचल प्रदेश में माचा चाय उत्पादन को व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने और विशेष श्रेणी की उच्च मूल्य वाली चायों के लिए वैश्विक बाजार तैयार करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रतिनिधिमंडल ने चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (एचपीकेवी), पालमपुर का भी दौरा किया। यहां अनुसंधान निदेशक डॉ. देशराज चौधरी तथा चाय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में माचा चाय उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, अनुसंधान गतिविधियों, उन्नत पौध सामग्री के विकास और इस क्षेत्र को व्यावसायिक रूप से विकसित करने के लिए आवश्यक संस्थागत सहयोग पर चर्चा हुई।
कृषि आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में कार्यरत इकाइयों का भी प्रतिनिधिमंडल ने निरीक्षण किया। खलेट स्थित लिटिल वाइल्ड एग्री प्राइवेट लिमिटेड में फल प्रसंस्करण, हर्बल चाय निर्माण, अरोमा ऑयल निष्कर्षण और कृषि उत्पादों के निर्जलीकरण से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन किया गया। वहीं परौर के धोरण क्षेत्र में स्थापित हिल स्प्राउट्स वर्टिकल फार्म में आईओटी आधारित प्रिसिजन फार्मिंग, संरक्षित खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन मॉडल का अवलोकन किया गया। जाईका प्रतिनिधियों ने स्थानीय कृषि उद्यमियों द्वारा आधुनिक तकनीकों के सफल उपयोग और नवाचार की सराहना की।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि जाईका इंडिया मिशन का यह दौरा हिमाचल प्रदेश सरकार और जाईका की सतत, बाजारोन्मुखी तथा जलवायु-अनुकूल कृषि विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एचपीसीडीपी (फेज-II) फसल विविधीकरण, कृषि मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, कृषि उद्यमिता विकास और अनुसंधान संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि चाय उत्पादकों, वैज्ञानिकों, किसान संगठनों और कृषि उद्यमियों के साथ मिशन की विस्तृत चर्चा से भविष्य की रणनीतियों को नई दिशा मिलेगी। विशेष रूप से माचा चाय उत्पादन, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और ग्रामीण उद्यमिता विकास के क्षेत्रों में यह सहयोग किसानों के लिए नए अवसर सृजित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांगड़ा घाटी की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां माचा जैसी उच्च मूल्य वाली विशेष चायों के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। ऐसे में जाईका मिशन का यह दौरा न केवल कांगड़ा चाय उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि प्रदेश में कृषि आधारित उद्यमिता और निर्यातोन्मुख खेती के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।






