शिमला। जिला परिषद शिमला को आखिरकार अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिल गया। गुरुवार को बचत भवन में आयोजित चुनाव में भूपेंद्र ने अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र रेटका को हराकर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भरत सिंह कलांटा ने मीनाक्षी को पराजित किया। चुनाव परिणाम के साथ ही करीब तीन महीने से जिला परिषद में शीर्ष पदों को लेकर बनी अनिश्चितता भी समाप्त हो गई।
अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में भूपेंद्र को 13 मत मिले, जबकि सुरेंद्र रेटका के पक्ष में 10 सदस्यों ने मतदान किया। दो मत अवैध घोषित किए गए। इस तरह भूपेंद्र ने बहुमत का जरूरी आंकड़ा हासिल करते हुए जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया।
उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी मुकाबला करीबी रहा। भरत सिंह कलांटा को 14 मत मिले, जबकि मीनाक्षी के पक्ष में 10 मत पड़े। एक मत अवैध घोषित किया गया। परिणाम घोषित होने के बाद भरत सिंह कलांटा को जिला परिषद का उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।
चुनाव प्रक्रिया उपायुक्त शिमला एवं पीठासीन अधिकारी अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में संपन्न हुई। मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपायुक्त ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष भूपेंद्र और उपाध्यक्ष भरत सिंह कलांटा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
जिला परिषद शिमला में कुल 25 निर्वाचित सदस्य हैं। मई-जून में हुए चुनाव के बाद किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, जिसके चलते अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में निर्दलीय सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पक्ष में बहुमत का दावा कर रहे थे। ऐसे में मतदान के दौरान बने अंतिम समीकरणों पर सभी की नजर थी।
इस चुनाव को स्थानीय स्तर की राजनीति के साथ-साथ शिमला जिले में ग्रामीण राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव से पहले भाजपा समर्थित 13 सदस्यों के शक्ति प्रदर्शन की खबरें सामने आई थीं, जबकि कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार के पक्ष में समर्थन जुटाने का दावा कर रही थी। अंततः अध्यक्ष पद पर 13 मत हासिल कर भूपेंद्र ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया।
गौरतलब है कि जिला परिषद के नव निर्वाचित 25 सदस्यों ने जून में उपायुक्त अनुपम कश्यप की मौजूदगी में शपथ ली थी। इनमें चंदलोग-नेरवा वार्ड से भूपेंद्र और टिक्कर वार्ड से भरत सिंह कलांटा भी शामिल थे।
चुनाव संपन्न होने के बाद उपायुक्त अनुपम कश्यप ने उम्मीद जताई कि नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जिला परिषद की जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि जिला परिषद ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अब नई जिला परिषद के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने, पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर प्रशासन तक पहुंचाने की चुनौती होगी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद परिषद के कामकाज में राजनीतिक स्थिरता आने की उम्मीद है।
इस चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि शिमला जिला परिषद के परिणामों ने स्थानीय स्तर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर सामने ला दिया है। अध्यक्ष पद के लिए 13 मत हासिल करना यह संकेत देता है कि चुनाव के दिन तक भाजपा समर्थित खेमे ने अपने पक्ष में आवश्यक संख्या जुटा ली थी। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवनिर्वाचित नेतृत्व इस राजनीतिक समर्थन को विकास कार्यों और प्रभावी जिला परिषद प्रशासन में किस तरह बदलता है।





