ज्येष्ठ मास 2026: तप, श्रद्धा और आस्था का पावन समय, जानिए प्रमुख व्रत और पर्व

सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह महीना तप, संयम, दान और साधना का प्रतीक है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास का प्रारंभ 2 मई से होकर 29 जून तक रहेगा। ग्रीष्म ऋतु के इस काल में जहां प्रकृति अपने उग्र रूप में होती है, वहीं धर्मग्रंथों में इसे आत्मशुद्धि, तपस्या और पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ समय बताया गया है।

भारतीय संस्कृति में इस मास को ‘जेठ’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत, दान और पूजा-पाठ से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रत्येक व्रत और पर्व का अपना विशेष महत्व है, जो परिवार, स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है।

मई माह में पड़ने वाले ज्येष्ठ मास के प्रमुख व्रत और त्योहार इस प्रकार हैं:

2 मई से ज्येष्ठ मास का शुभारंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगा, जो इस पावन महीने की शुरुआत मानी जाती है।

3 मई को देवर्षि नारद प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा, साथ ही कई स्थानों पर मेलों का आयोजन भी होगा।

5 मई को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा, जो भगवान गणेश को समर्पित है और विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है।

8 मई को जैन समाज में तारण तरण गुरु पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।

10 मई से पंचक काल का आरंभ होगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए विशेष ध्यान के साथ देखा जाता है।

13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जिसे पापों का नाश करने वाला माना गया है।

14 मई को वट सावित्री व्रत प्रारंभ होगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, साथ ही इस दिन प्रदोष व्रत भी किया जाएगा।

15 मई को सूर्य देव वृष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन केवट जयंती और भगवान शांतिनाथ से जुड़े जैन पर्व भी मनाए जाएंगे।

16 मई को शनि जयंती का विशेष महत्व रहेगा, साथ ही वट सावित्री अमावस्या पर स्नान, दान और पितरों का स्मरण किया जाएगा।

17 मई से अधिमास अर्थात पुरुषोत्तम मास का आरंभ होगा, जिसे भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

18 मई को चंद्र दर्शन का शुभ अवसर रहेगा और जैन समुदाय में रोहिणी व्रत रखा जाएगा।

20 मई को विनायकी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाएगा।

21 और 22 मई को गुरु-पुष्य और शुक्र-पुष्य नक्षत्र के विशेष योग बनेंगे, जो अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

25 मई को आल्हा जयंती के साथ नवतपा की शुरुआत होगी, जो गर्मी के सबसे प्रखर दिनों का संकेत है।

26 मई को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा, जो मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का स्मरण कराता है।

27 मई को पुरुषोत्तमी एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जिसका विशेष महत्व अधिमास में बढ़ जाता है।

28 मई को ईद-उल-अजहा का पर्व भी मनाया जाएगा, जो आपसी भाईचारे और त्याग का संदेश देता है, साथ ही इस दिन प्रदोष व्रत भी होगा।

30 मई को पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा, जो दान और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

31 मई को अधिमास की पूर्णिमा के अवसर पर स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा।

ज्येष्ठ मास हमें संयम, सेवा और साधना का संदेश देता है। इस समय किया गया प्रत्येक शुभ कर्म कई गुना फलदायी माना जाता है, इसलिए इस मास में श्रद्धा और नियम के साथ धर्म का पालन करना विशेष लाभकारी होता है।