हिमाचल प्रदेश में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के बीच ऊना जिले से एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है, जिसने राज्य में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष कार्य बल कांगड़ा की एक योजनाबद्ध कार्रवाई में एक किलोग्राम से अधिक नशीला पदार्थ बरामद किया गया है, जिसे प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी खेपों में से एक माना जा रहा है। इस मामले में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि यह कारोबार किसी व्यापक और संगठित तंत्र के तहत संचालित हो रहा था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान ऊना जिले के ही रहने वाले गुरमुख सिंह, रमन कुमार और सर्वजीत सिंह उर्फ विन्दर के रूप में हुई है। ये तीनों एक वाहन में सवार होकर संदिग्ध परिस्थितियों में क्षेत्र से गुजर रहे थे, जब विशेष कार्य बल की टीम ने उन्हें रोका और तलाशी ली। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि उक्त वाहन में नशीला पदार्थ ले जाया जा रहा है।
घटना शनिवार देर रात की है, जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेनू कुमारी के नेतृत्व में टीम गश्त पर थी। सूचना मिलने के बाद संतोषगढ़ क्षेत्र में एक नाका स्थापित किया गया और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में संदिग्ध वाहन को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन की डिक्की से पंद्रह पैकेट बरामद किए गए, जिनमें हल्के भूरे रंग का पदार्थ मिला। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि यह चिट्टा है, जिसका कुल वजन एक किलोग्राम से अधिक पाया गया। मौके पर ही इसे विधिवत सील कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और वाहन को भी कब्जे में ले लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की दिशा में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह नशीला पदार्थ कहां से लाया गया तथा कहां पहुंचाया जाना था।
विशेष कार्य बल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में नशे के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है और इस तरह के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही मुहिम में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी पहले शायद ही कभी हुई हो।
जानकारों के अनुसार, इस खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है, जो इस बात की ओर इशारा करती है कि यह कोई साधारण तस्करी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इससे पहले भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले सामने आए हैं, लेकिन इस बार की कार्रवाई ने इस समस्या की गंभीरता को और अधिक उजागर कर दिया है।
हाल के महीनों में शिमला, बिलासपुर और कांगड़ा जैसे क्षेत्रों में भी नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले सामने आए हैं, जिनमें कभी-कभी नाबालिगों की संलिप्तता भी देखने को मिली है। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि तस्करी का जाल लगातार फैल रहा है और समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी चपेट में ले रहा है।
इस बीच, पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना और इसे पूरी तरह ध्वस्त करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बरामदगी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे तंत्र को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर खतरे से बचाया जा सके।





