भर्ती, बेरोजगारी और बैकडोर नियुक्तियों को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, युवाओं से किए वादे निभाने की मांग

शिमला:

हिमाचल प्रदेश में रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफी, नियमित भर्तियों में देरी और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता खत्म करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले युवाओं को नियमित रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन ढाई वर्ष बीतने के बाद भी उन वादों को धरातल पर नहीं उतारा गया।

शिमला में जारी एक बयान में संदीपनी भारद्वाज ने बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व पर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की बजाय प्रदेश के युवाओं के भविष्य और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार रोजगार के मोर्चे पर अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक बयानबाजी का सहारा ले रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने नियमित भर्ती प्रक्रिया बहाल करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद न तो व्यापक स्तर पर नियमित भर्तियां शुरू हो सकीं और न ही बेरोजगार युवाओं को अपेक्षित अवसर मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कर्मचारी चयन आयोग में कथित अनियमितताओं का हवाला देकर आयोग को भंग कर दिया गया, लेकिन आज तक सरकार ने न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की और न ही यह स्पष्ट किया कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार कौन थे।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का दावा करती है, तो उसे इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की जनता और युवाओं के सामने तथ्य रखने चाहिए। भाजपा का कहना है कि पारदर्शिता की बात करने वाली सरकार इस मुद्दे पर जवाबदेही से बच रही है।

संदीपनी भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग 700 युवाओं की नियुक्तियां अंतिम चरण में थीं, लेकिन सरकार बदलने के बाद इन प्रक्रियाओं को रोक दिया गया, जिससे अनेक अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बेरोजगार युवा अब यह जानना चाहता है कि चुनाव के दौरान किए गए नियमित भर्ती के वादे आखिर कब पूरे होंगे।

भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर बैकडोर नियुक्तियों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रणाली को कमजोर कर राजनीतिक प्रभाव के आधार पर नियुक्तियों की नई व्यवस्था विकसित की है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न विभागों में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों, उनके समर्थकों और परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, जबकि योग्य अभ्यर्थी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था को लेकर भी भाजपा ने सरकार को घेरा। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले आउटसोर्स भर्ती समाप्त कर नियमित नियुक्तियां देने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में आउटसोर्स नियुक्तियों में भी वित्त विभाग की स्वीकृति के नाम पर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और मेरिट आधारित चयन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठाती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी चयन आयोग से जुड़े मामलों की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न पेपर लीक मामलों में जांच एजेंसियों को सक्रिय किया, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तथा पुनः परीक्षाएं आयोजित कराई हैं, जबकि प्रदेश सरकार अपने ही दावों पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखा सकी।

संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस नेतृत्व पर संसद के बजाय सड़कों पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर चर्चा का सर्वोत्तम मंच संसद है। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह राजनीतिक आरोपों की बजाय प्रदेश के युवाओं को यह बताए कि लंबित भर्ती प्रक्रियाएं कब पूरी होंगी, कर्मचारी चयन आयोग मामले की जांच किस चरण में है और नियमित रोजगार उपलब्ध कराने के चुनावी वादे कब पूरे किए जाएंगे।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी हिमाचल प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के हितों और उनके रोजगार के अधिकारों की आवाज लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने कांग्रेस सरकार से मांग की कि राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, लंबित नियुक्तियों को शीघ्र पूरा किया जाए और युवाओं से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

प्रदेश में रोजगार, भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव आने वाले समय में भी राज्य की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने के संकेत दे रहा है, विशेषकर तब जब बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों का विषय युवाओं के बीच लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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