हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर जिले के झंडूता परीक्षा केंद्र में उत्तर पुस्तिकाओं के साथ कथित छेड़छाड़ की आशंका अब फोरेंसिक जांच में सही पाई गई है। इस खुलासे ने न केवल शिक्षा विभाग बल्कि अभिभावकों और छात्रों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। बोर्ड प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह मामला मार्च 2025 में आयोजित हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार राजकीय उच्च पाठशाला ज्योरा के नौ छात्रों ने परीक्षा परिणाम आने के बाद बोर्ड को लिखित शिकायत भेजी थी। छात्रों का आरोप था कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के बहुविकल्पीय प्रश्नों वाले हिस्से में गड़बड़ी की गई है। शुरुआत में यह मामला सामान्य शिकायत की तरह दिखाई दिया, लेकिन जब बोर्ड ने जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे।
शिक्षा बोर्ड ने अक्टूबर 2025 में संबंधित छात्रों को बोर्ड मुख्यालय बुलाया और उनकी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान करवाया। जांच के दौरान छात्रों और अधिकारियों को उत्तर पुस्तिकाओं में संदिग्ध बदलाव दिखाई दिए। इसके बाद बोर्ड ने पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच करवाने का फैसला लिया और उत्तर पुस्तिकाओं को धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया।
फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा रासायनिक और तकनीकी परीक्षण के बाद यह पुष्टि हुई कि उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ उत्तरों में बदलाव के संकेत मिले हैं। मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब विशेष जांच समिति ने उत्तर पुस्तिकाओं की पैकिंग प्रक्रिया की पड़ताल की।
जांच में पाया गया कि जिन “टैंपर-प्रूफ” लिफाफों में उत्तर पुस्तिकाएं भेजी गई थीं, उनके सीरियल नंबर पैकिंग मेमो में दर्ज नंबरों से मेल नहीं खाते थे। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि परीक्षा केंद्र या परिवहन प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर लिफाफों की अदला-बदली की गई ताकि उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाई जा सके।
शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष Rajesh Sharma ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड की प्राथमिकता छात्रों के हितों की रक्षा करना है और जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बोर्ड प्रशासन ने विशेष जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रभावित छात्रों को राहत देने का भी फैसला लिया है। जिन प्रश्नों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, उन प्रश्नों के पूरे अंक संबंधित छात्रों को दिए जाएंगे ताकि उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर न पड़े। बोर्ड ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट और सभी साक्ष्य शिक्षा विभाग को सौंप दिए हैं।
इस घटना ने प्रदेश की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैंपर-प्रूफ व्यवस्था के बावजूद उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाई गई, तो यह परीक्षा प्रबंधन प्रणाली में बड़ी खामी की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञ अब परीक्षा केंद्रों, पैकिंग व्यवस्था और उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन तंत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों और छात्रों के बीच भी इस मामले को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के भविष्य का आधार होती हैं और ऐसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करती हैं। वहीं शिक्षा विभाग के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि अब पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है और शिक्षा विभाग दोषियों के खिलाफ कितना सख्त रुख अपनाता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली में छोटी सी लापरवाही भी हजारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।





