हिमाचल में बदला मौसम का मिजाज: कई जिलों में बारिश, दो दिन तेज आंधी-तूफान का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही वर्षा ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं आने वाले दो दिनों के लिए तेज आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी ने प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राजधानी शिमला सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा, ओलावृष्टि और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। धर्मशाला में 30.6 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि कांगड़ा में 29.4 मिलीमीटर, पालमपुर में 15.4 मिलीमीटर और मंडी में 13.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। इसके अलावा ऊपरी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं। विशेष रूप से जुब्बल और आसपास के इलाकों में हुई ओलावृष्टि ने बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे सेब और अन्य फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

लगातार हो रही वर्षा का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 8 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अधिकतम तापमान में भी 2 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कमी आई है। ताबो में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री दर्ज किया गया, जो इस समय के लिए सामान्य से काफी कम है। वहीं ऊना में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो मैदानी क्षेत्रों में गर्मी की स्थिति को दर्शाता है।

मौसम विभाग के अनुसार 4, 5 और 6 मई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाओं का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

राज्य के कई हिस्सों जैसे ददाहू, रेणुकाजी, संगड़ाह, बलद्वाड़ा, सराहन, चौपाल और घाघस में भी बीते 24 घंटों के दौरान अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। लगातार बदलते मौसम के कारण जहां एक ओर किसानों और बागवानों को फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है, वहीं दूसरी ओर तापमान में गिरावट से आम लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का अस्थिर मौसम पहाड़ी राज्यों में इस समय सामान्य प्रवृत्ति का हिस्सा होता है, लेकिन तेज हवाओं और ओलावृष्टि की घटनाएं कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती हैं। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम से जुड़ी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ स्वरूप राहत और चिंता दोनों लेकर आया है—जहां तापमान में गिरावट ने सुकून दिया है, वहीं आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का खतरा आने वाले दिनों में स्थिति को और जटिल बना सकता है।