31 मई से पहले लगवाएं एचपीवी वैक्सीन: हमीरपुर में सर्वाइकल कैंसर रोकथाम अभियान को तेज करने की तैयारी
हमीरपुर में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए चलाया जा रहा एचपीवी टीकाकरण अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों, शिक्षकों और अभिभावकों से मिलकर इस अभियान को जन-जागरूकता आंदोलन का रूप देने की अपील की है, ताकि 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की कोई भी लड़की इस महत्वपूर्ण टीके से वंचित न रह जाए।
जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि एचपीवी वैक्सीन केवल एक टीका नहीं, बल्कि लड़कियों के भविष्य और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा एक दीर्घकालिक संरक्षण कवच है। इसी उद्देश्य से बुधवार को हमीरपुर डिग्री कॉलेज परिसर में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें जिले के हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने शिक्षकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे उन छात्राओं तक सक्रिय रूप से पहुंचें जो अभी तक एचपीवी वैक्सीन नहीं लगवा पाई हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सोशल मीडिया पर फैलने वाली अधूरी या भ्रामक जानकारियां अभिभावकों और बच्चों के मन में डर और भ्रम पैदा कर देती हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि छात्राएं अपने शिक्षकों पर विश्वास करती हैं और उनसे प्रभावित भी होती हैं।
उपायुक्त ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे गंभीर कैंसरों में शामिल है, लेकिन समय रहते टीकाकरण के माध्यम से इससे बचाव संभव है। उन्होंने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी पहल बताते हुए कहा कि वर्तमान में यह टीका 14-15 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों को मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है और यह अवसर भविष्य में दोबारा मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए सभी पात्र छात्राओं को 31 मई से पहले टीकाकरण अवश्य करवा लेना चाहिए।
जिला प्रशासन के अनुसार हमीरपुर में इस अभियान के तहत लगभग 2967 लड़कियों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 1228 छात्राएं यह वैक्सीन लगवा चुकी हैं, जबकि शेष छात्राओं तक पहुंचने के लिए स्कूल स्तर पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और अभिभावक मिलकर जागरूकता बढ़ाएं तो जिला इस लक्ष्य को समय पर हासिल कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी एचपीवी वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी बताया। जानकारी दी गई कि यह वैक्सीन पहली बार वर्ष 2006 में शुरू की गई थी और अब तक दुनिया के 159 देशों में इसकी 50 करोड़ से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। भारत में पहले यह टीका केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध था, लेकिन अब सरकारी स्तर पर इसे मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लड़कियां लाभान्वित हो सकें।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि एचपीवी संक्रमण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। समय पर टीकाकरण से भविष्य में इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं किशोरियों के टीकाकरण पर विशेष जोर देती रही हैं।
हमीरपुर, जो शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के मामले में प्रदेश के अग्रणी जिलों में गिना जाता है, वहां इस अभियान को लेकर प्रशासन विशेष उम्मीदें लगाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समाज समय रहते इस दिशा में जागरूक हुआ तो आने वाले वर्षों में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया।





