हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के सिरमौर जिले में रविवार देर शाम हुए एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है और उसका उपचार नाहन मेडिकल कॉलेज में जारी है। मृतकों में एक सरकारी स्कूल की महिला शिक्षिका भी शामिल हैं। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, तीखे मोड़ों पर यातायात प्रबंधन और सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार, हादसा सिरमौर जिले में नाहन-कुमारहट्टी-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर सराहां अस्पताल के समीप एक तीखे मोड़ पर हुआ। बताया जा रहा है कि कार अनियंत्रित होकर पहले सड़क किनारे बने पैराफिट से टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि पैराफिट टूट गया और वाहन लगभग 150 फीट गहरी खाई में जा गिरा। दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा बचाव अभियान शुरू किया गया।
पुलिस के अनुसार, कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसे में कार चला रहे 65 वर्षीय अधिकारी जेटली की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। उनके साथ यात्रा कर रही 48 वर्षीय रीना शर्मा, जो एक सरकारी विद्यालय में शिक्षिका थीं, ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय उर्मिल जेटली को प्राथमिक उपचार के बाद सराहां अस्पताल से डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज, नाहन रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में उनकी भी मृत्यु हो गई।
अधिकारी जेटली और उर्मिल जेटली पति-पत्नी थे, जबकि उनका बेटा इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और उसे विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।
पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि तीखे मोड़ पर वाहन का संतुलन बिगड़ने के कारण कार पैराफिट से टकराकर गहरी खाई में जा गिरी। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच और तकनीकी निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।
सोमवार सुबह नाहन मेडिकल कॉलेज में तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम किए जाने के बाद उनके शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के इस हिस्से पर अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में तीखे मोड़, गहरी खाइयां, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां और कई स्थानों पर अपर्याप्त सुरक्षा इंतजाम दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा देते हैं। ऐसे में सड़कों पर मजबूत क्रैश बैरियर, बेहतर चेतावनी संकेत, नियमित सड़क सुरक्षा ऑडिट और सावधानीपूर्वक वाहन संचालन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
सिरमौर का यह हादसा केवल तीन लोगों की असामयिक मृत्यु की खबर नहीं है, बल्कि यह उन चुनौतियों की भी याद दिलाता है जिनका सामना पहाड़ी राज्यों में सड़क यात्रा के दौरान प्रतिदिन करना पड़ता है। लगातार हो रहे ऐसे हादसे इस बात की ओर संकेत करते हैं कि सड़क अवसंरचना को और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ वाहन चालकों में भी सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
यह वेब आधारित समाचार रिपोर्ट है।





