पंजाब में वर्षों से राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र रहे बेअदबी मामलों की जांच एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। उन्हें सोमवार सुबह 11 बजे पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़ में जांच टीम के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी बेअदबी प्रकरण और उससे जुड़े घटनाक्रमों के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। इसी क्रम में पूर्व सरकार के दौरान लिए गए प्रशासनिक और पुलिस स्तर के निर्णयों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी विभिन्न बयानों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर घटनाओं की पूरी श्रृंखला को समझने का प्रयास कर रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में इस मामले से जुड़े कई दावे और बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। विशेष रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला के बयान के बाद मामले ने नया राजनीतिक मोड़ लिया है। सांपला ने बेअदबी मामले में राज्यपाल को दिए गए एक प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया था, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े तथ्यों की दोबारा पड़ताल शुरू की।
जांच के दायरे में उस समय के प्रशासनिक निर्णय भी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस नेतृत्व के बीच बातचीत हुई थी। इसके अलावा पूर्व अकाली विधायक मनतार बराड़ के साथ हुई चर्चाओं का भी उल्लेख सामने आया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ओएसडी ने भी यह पुष्टि की थी कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के संबंध में निर्देश रात के समय जारी किए गए थे। इन दावों और बयानों की भी जांच एजेंसियां तथ्यात्मक रूप से पड़ताल कर रही हैं।
बेअदबी का मुद्दा पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा रहा है। 2015 में धार्मिक ग्रंथों के कथित अपमान की घटनाओं और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने राज्य की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया। इन घटनाओं के बाद पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। यही कारण है कि यह मामला आज भी पंजाब की सबसे संवेदनशील राजनीतिक और धार्मिक बहसों में शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेअदबी प्रकरण केवल एक कानूनी जांच का विषय नहीं, बल्कि पंजाब की चुनावी राजनीति का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी लगातार यह दावा करती रही है कि उसकी सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर रही है, जबकि शिरोमणि अकाली दल इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देता रहा है।
अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली एसआईटी की पूछताछ पर है। इस पूछताछ से जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। साथ ही, यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब की राजनीति में बेअदबी मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।





