मंडी में तेंदुए का आतंक: गोशाला का दरवाजा तोड़ तीन भेड़ों को बनाया शिकार, विधवा महिला की आजीविका पर गहरा संकट

मंडी।

मंडी शहर से सटे अरड़ा स्कोर गांव में रविवार देर रात तेंदुए के हमले ने एक गरीब परिवार की आजीविका पर गहरी चोट पहुंचा दी। जंगली जानवर ने गोशाला का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने के बाद तीन भेड़ों को मार डाला। इस घटना में पीड़ित परिवार को लगभग 70 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। मृत भेड़ों में एक गर्भवती भेड़ भी शामिल थी, जिसके कारण नुकसान और अधिक गंभीर माना जा रहा है।

घटना की शिकार बिमला देवी एक विधवा महिला हैं, जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। सोमवार सुबह जब वह रोज की तरह गोशाला पहुंचीं तो वहां का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। गोशाला का दरवाजा टूटा हुआ था और भीतर उनकी तीनों भेड़ें मृत अवस्था में पड़ी थीं। भेड़ों की गर्दन पर गहरे घाव थे और खून बिखरा हुआ था, जिससे स्पष्ट था कि उन पर किसी हिंसक जंगली जानवर ने हमला किया है।

बिमला देवी ने बताया कि उनके पति और बेटे का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है और वह शहर में लोगों के घरों में काम करके अपने दो पोतों का पालन-पोषण करती हैं। सीमित आय के बीच भेड़ पालन उनके लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन था। इन पशुओं से मिलने वाली आमदनी घर के खर्च और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में सहारा देती थी। तेंदुए के इस हमले ने उनकी वर्षों की मेहनत और आर्थिक सुरक्षा को एक ही रात में समाप्त कर दिया।

उन्होंने बताया कि जिन भेड़ों को तेंदुए ने मार डाला, उनमें से एक जल्द ही बच्चे को जन्म देने वाली थी। ऐसे में उन्हें केवल वर्तमान पशुधन का ही नहीं, बल्कि भविष्य में मिलने वाली संभावित आय का भी नुकसान उठाना पड़ेगा। आर्थिक रूप से पहले से ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे परिवार के लिए यह घटना किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

घटना के बाद बिमला देवी ने उपमंडलाधिकारी (सदर) को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने प्रशासन से उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है, ताकि उन्हें हुए नुकसान की आंशिक भरपाई हो सके और वह दोबारा पशुपालन शुरू कर सकें। साथ ही उन्होंने वन विभाग से भी त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए क्षेत्र में जंगली जानवरों की बढ़ती गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।

इस घटना के बाद अरड़ा स्कोर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलती रही है, लेकिन अब जिस तरह उसने गोशाला का दरवाजा तोड़कर हमला किया है, उससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीण अपने पशुधन के साथ-साथ बच्चों और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी आशंकित हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को प्रभावित क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, तेंदुए की गतिविधियों पर निगरानी रखने और आवश्यक होने पर उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

यह घटना एक बार फिर हिमाचल प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने लाती है, जहां जंगलों से सटे गांवों में रहने वाले लोग आए दिन जंगली जानवरों के हमलों के कारण आर्थिक नुकसान और असुरक्षा की भावना का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और समयबद्ध मुआवजा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

वेब जनरेटेड न्यूज़ रिपोर्ट।