हमीरपुर।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में डाक वितरण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। उप डाकघर भलेठ के अंतर्गत करोट डाक शाखा से जुड़े एक ग्रामीण डाक सेवक के किराए के कमरे से करीब दो महीने से वितरित न की गई लगभग 800 लोगों की डाक बरामद हुई है। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरियों से संबंधित कॉल लेटर सहित अनेक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज शामिल हैं। मामले के सामने आने के बाद डाक विभाग ने संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में हाल ही में मंडी जिले के जोगिंद्रनगर क्षेत्र से भी डाक वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। अब हमीरपुर की इस घटना ने डाक व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार संबंधित ग्रामीण डाक सेवक, जो मूल रूप से हरियाणा का निवासी बताया जा रहा है, करोट डाक शाखा के अंतर्गत लगभग 20 गांवों में डाक वितरण का कार्य संभाल रहा था। पिछले कुछ समय से विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लोगों तक समय पर डाक नहीं पहुंच रही है। कई लाभार्थियों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज और सरकारी पत्र लंबे समय तक प्राप्त न होने की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतों के आधार पर डाक विभाग ने मामले की जांच शुरू की। 16 जुलाई को डाक निरीक्षक ने करोट डाक शाखा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड की जांच में कई डाक लेख ‘होल्ड’ की स्थिति में दर्ज पाए गए। जब अधिकारियों ने संबंधित प्राप्तकर्ताओं से दूरभाष पर संपर्क किया तो कई लोगों ने स्पष्ट किया कि उन्हें संबंधित डाक कभी प्राप्त ही नहीं हुई। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि उन्हें डाक तो मिली थी, लेकिन उनसे प्राप्ति रसीद या हस्ताक्षर तक नहीं लिए गए थे, जिससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों ने संबंधित डाक सेवक के किराए के कमरे की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वहां बड़ी मात्रा में बिना वितरित किए गए सरकारी दस्तावेजों का ढेर मिला। बरामद सामग्री में आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, विभिन्न संस्थानों के कॉल लेटर तथा अन्य महत्वपूर्ण डाक सामग्री शामिल थी, जिन्हें समय पर संबंधित लोगों तक पहुंचाया जाना था।
डाक विभाग ने इसे सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित ग्रामीण डाक सेवक को तत्काल निलंबित कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डाक वितरण में लापरवाही कितने समय से चल रही थी, इसके पीछे क्या कारण थे और क्या इस मामले में किसी अन्य स्तर पर भी चूक हुई है।
विभाग ने यह भी आश्वासन दिया है कि कमरे से बरामद सभी डाक सामग्री को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि लोगों को और अधिक असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही पूरे वितरण रिकॉर्ड का मिलान कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज लंबित न रहे।
यह घटना डाक वितरण व्यवस्था में नियमित निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है। विशेष रूप से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और सरकारी नियुक्ति पत्र जैसे संवेदनशील दस्तावेजों की समय पर डिलीवरी नागरिकों के अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
वेब जनरेटेड न्यूज़ रिपोर्ट।





