हिमाचल में मानसून का कहर: चंबा में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट; 178 सड़कें बंद, जनजीवन प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी राज्य की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। चंबा जिले में मंगलवार को बादल फटने जैसी परिस्थितियों के बीच अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई, जबकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले 24 से 48 घंटों तक भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी है।

सबसे अधिक प्रभावित चंबा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में उफनाए सुल्तानपुर नाले ने भारी तबाही मचाई। अचानक आए पानी और मलबे के सैलाब से 25 से अधिक रिहायशी मकानों तथा एक दुकान को नुकसान पहुंचा, जबकि एक दर्जन से अधिक वाहन मलबे में दब गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है, हालांकि प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।

राज्य के अन्य हिस्सों में भी लगातार वर्षा के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हुआ है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, भारी बारिश के कारण प्रदेशभर में कुल 178 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इनमें सबसे अधिक 58 सड़कें मंडी जिले में प्रभावित हैं। कुल्लू में 42, चंबा में 30, सिरमौर में 26, शिमला में 16, लाहौल-स्पीति में तीन, कांगड़ा में दो तथा ऊना में एक सड़क यातायात के लिए बंद है। इसके अलावा 107 पेयजल योजनाएं और 62 विद्युत ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं, जिससे अनेक क्षेत्रों में पानी और बिजली की आपूर्ति बाधित हुई है।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए कांगड़ा, ऊना और चंबा जिलों में अत्यधिक से भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं शिमला, मंडी और कुल्लू जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए अलग-अलग स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश के शेष क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा होने का पूर्वानुमान है।

इसके साथ ही मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में मध्यम स्तर की फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का खतरा भी व्यक्त किया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा टालने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

बारिश का असर राजधानी शिमला की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) के अनुसार, सतलुज जलापूर्ति परियोजना में ट्रांसफार्मर खराब होने, बाढ़ और जल स्रोतों में अत्यधिक गाद जमा होने के कारण आने वाले कुछ दिनों तक शहर में जलापूर्ति प्रभावित रह सकती है। निगम ने नागरिकों से पानी का संयमित उपयोग करने का अनुरोध किया है।

प्रदेश में अगले दो दिनों के दौरान भी मौसम के खराब बने रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने तीन अगस्त तक कई इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है। बुधवार को सिरमौर जिले और गुरुवार को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा तथा सिरमौर जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

बारिश के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। चंबा जिले के जोट में 137.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि नैना देवी में 118 मिमी, मुरारी देवी में 83 मिमी, घमरूर और शिमला में 59.2 मिमी, ब्राह्मणी में 54.6 मिमी, जोगिंदरनगर में 52 मिमी, मलराओं में 47 मिमी, ओलिंडा में 44 मिमी, हमीरपुर में 43 मिमी तथा नगरोटा सूरियां में 42.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। कई स्थानों पर तेज गर्जना और बिजली चमकने के साथ आंधी भी चली।

तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शिमला का न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस, धर्मशाला 17.6, मनाली 19.2, सोलन 21, मंडी 24.2, बिलासपुर 25, हमीरपुर 25.4, कुफरी 15.8, नाहन 21.5, कल्पा 15.4, केलांग 14, ऊना 22 तथा भुंतर 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान चंबा के भरमौर में 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

प्रदेश में इस वर्ष 30 जून से मानसून की शुरुआत के बाद लगातार बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक मानसून जनित घटनाओं में 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सड़क, बिजली, पेयजल और निजी संपत्तियों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर लगातार नजर रखने, जोखिम वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही तीव्र वर्षा के कारण अगले कुछ दिनों तक भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है।