किन्नौर कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव पर मंत्री जगत नेगी नाराज, PCC के फैसले पर उठाए सवाल

शिमला। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री और किन्नौर से कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने किन्नौर जिले में पार्टी संगठन में किए गए बदलाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के फैसले पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई है। नेगी ने कल्पा, निचार और पूह ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग करने के फैसले को गलत बताया है और आरोप लगाया है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं को नई संगठनात्मक व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 5 सितंबर को किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटी के साथ तीनों ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग किया था। हालांकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी और तीनों ब्लॉक अध्यक्षों को उनके पदों पर बनाए रखा गया।

जगत नेगी ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि किन्नौर में कांग्रेस के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नई कार्यकारिणी में ऐसे लोगों को जगह दी गई है, जो पहले पार्टी के सक्रिय संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा नहीं रहे हैं। उन्होंने इस संदर्भ में ‘जयचंद’ और ‘स्लीपर सेल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और संबंधित लोगों की ओर से इस पर अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।



नेगी ने अपने परिवार के कांग्रेस से लंबे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता दो बार विधायक रहे और उन्होंने ऐसे समय में पार्टी का झंडा उठाया था, जब किन्नौर में कांग्रेस का संगठन आज की तरह मजबूत नहीं था। नेगी ने अपने कई दशकों के राजनीतिक जुड़ाव और मौजूदा विधायक के रूप में अपने अनुभव का भी हवाला दिया।

मंत्री की आपत्ति केवल संगठनात्मक फेरबदल तक सीमित नहीं है। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि किन्नौर कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक मतभेद अब सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद की पृष्ठभूमि में जून में निगम भंडारी की किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के बाद पैदा हुई असहमति भी शामिल है।

नेगी ने कहा कि किन्नौर कांग्रेस के हजारों सदस्य हैं और वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन में पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया तो इससे संगठन मजबूत कैसे होगा।

प्रदेश कांग्रेस के स्तर पर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने मंत्री और जिला अध्यक्ष, दोनों से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की बात कही है।

किन्नौर कांग्रेस का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हिमाचल में राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए जमीनी नेटवर्क तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में किसी भी जिले में ब्लॉक और जिला स्तर के संगठन में बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं होता, बल्कि इसका असर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी संगठन पर भी पड़ सकता है।

जगत नेगी के सार्वजनिक विरोध ने फिलहाल किन्नौर कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक निर्णय लेने की प्रक्रिया और पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर बहस को सामने ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इस मतभेद को किस तरह सुलझाता है और नई संगठनात्मक व्यवस्था में पुराने तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं को कितना प्रतिनिधित्व मिलता है।