धर्मशाला। : धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा से राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बुधवार को कई घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने उनकी आय, संपत्तियों, जमीन से जुड़े लेन-देन, बैंक खातों और परिवार के नाम दर्ज संपत्तियों सहित कई पहलुओं पर जानकारी मांगी।

सुधीर शर्मा दोपहर करीब एक बजे धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाना पहुंचे और अधिकारियों के साथ विस्तृत पूछताछ का सामना किया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ शाम तक चली। शर्मा ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जांच अधिकारियों ने उन्हें एक विस्तृत प्रश्नावली दी थी और करीब 40 से 50 सवाल पूछे गए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी सवालों के जवाब दिए और एजेंसी द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई।
जांच का दायरा वर्ष 2013 से 2023 तक की अवधि से जुड़ा बताया गया है। इस दौरान शर्मा की व्यक्तिगत संपत्तियों के साथ-साथ उनके परिवार से संबंधित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस की ओर से किन विशेष संपत्तियों या लेन-देन को संदिग्ध माना गया है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए मामले में किसी संपत्ति या लेन-देन को अवैध या आय से अधिक मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
विजिलेंस ब्यूरो ने 29 जुलाई 2026 को सुधीर शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। शर्मा इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनका कहना है कि उनकी संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध हैं।
बुधवार की पूछताछ इस मामले में शर्मा की पहली उपस्थिति नहीं थी। इससे पहले वह 18 अगस्त को धर्मशाला और 21 अगस्त को शिमला में विजिलेंस अधिकारियों के समक्ष पेश हो चुके हैं। लगातार हो रही पूछताछ से संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय विवरणों का विस्तृत परीक्षण कर रही है।
पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत में शर्मा ने कहा कि जांच अधिकारियों ने उनसे परिवार और अन्य संपत्तियों से जुड़े कई सवाल पूछे और उन्होंने उनका जवाब दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विजिलेंस को आगे किसी दस्तावेज या अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होगी तो वह दोबारा जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होकर सहयोग करेंगे।
शर्मा ने जांच को राजनीतिक साजिश का हिस्सा भी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है और कहा कि वह इस मामले में अपने दस्तावेज जांच एजेंसी के सामने रखने के लिए तैयार हैं। ये आरोप सुधीर शर्मा का पक्ष हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राज्य सरकार या विजिलेंस की ओर से इन आरोपों को सही ठहराने वाला कोई निष्कर्ष इस स्तर पर सामने नहीं आया है।
इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जांच अभी जारी है। विजिलेंस द्वारा जुटाए जा रहे बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, आय के स्रोत और परिवार से जुड़े वित्तीय विवरण यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं।
कानूनी दृष्टि से भी एफआईआर दर्ज होना या जांच के दौरान पूछताछ किया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में अभियोजन को यह स्थापित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति की संपत्ति और वैध रूप से ज्ञात आय तथा उसके स्रोतों के बीच ऐसा अंतर है जिसे कानून के तहत आपराधिक दायित्व के लिए पर्याप्त माना जा सके। अंतिम निष्कर्ष जांच और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सुधीर शर्मा के मामले में भी अब आगे की दिशा विजिलेंस द्वारा दस्तावेजों की जांच, आवश्यक होने पर अतिरिक्त पूछताछ और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। शर्मा ने अपनी ओर से जांच में सहयोग जारी रखने की बात कही है, जबकि एजेंसी की जांच यह तय करेगी कि दर्ज आरोपों के संबंध में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।





