हिमाचल और पंजाब में चिट्टा तस्करी पर श्रीकांत शर्मा का हमला, कांग्रेस और आप सरकारों से मांगा जवाब

भाजपा प्रभारी ने नशा माफिया को कथित सरकारी संरक्षण मिलने के लगाए आरोप, अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क और उसके संरक्षकों की निष्पक्ष जांच की मांग

शिमला,  हिमाचल प्रदेश और पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा के हिमाचल प्रदेश प्रभारी एवं विधायक श्रीकांत शर्मा ने हिमाचल की कांग्रेस सरकार और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दोनों राज्यों में चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि नशा माफिया को कथित सरकारी संरक्षण मिलने के कारण उसका नेटवर्क लगातार सक्रिय है।

श्रीकांत शर्मा ने कहा कि नशे का बढ़ता कारोबार युवाओं के भविष्य और परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके अनुसार, सरकारों की ओर से नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने और उसके पीछे काम करने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए ठोस परिणाम सामने आने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल और पंजाब में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना केवल पुलिस या कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रशासन, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समाज को भी मिलकर काम करना होगा।

नशा तस्करी के नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की मांग

भाजपा नेता ने दोनों राज्य सरकारों से सवाल किया कि यदि नशे के खिलाफ अभियान प्रभावी ढंग से चल रहे हैं, तो तस्करी के बड़े नेटवर्क और उनकी आपूर्ति शृंखलाओं को समाप्त करने में कितनी सफलता मिली है। उन्होंने मांग की कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के साथ-साथ उन्हें कथित रूप से संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी जांच की जाए।

शर्मा ने कहा कि नशा तस्करी को केवल छोटे स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रखकर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जांच का दायरा अंतरराज्यीय आपूर्ति नेटवर्क, तस्करी के वित्तीय पहलुओं और इस अवैध कारोबार से जुड़े संभावित सहयोगियों तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने दोनों राज्यों में नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावों और जमीनी स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, सरकारी संरक्षण से जुड़े आरोपों के समर्थन में उन्होंने इस बयान में कोई विशिष्ट मामला या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

युवाओं का भविष्य सबसे बड़ी चिंता

शर्मा ने चिट्टे को पंजाब और हिमाचल के सामने मौजूद गंभीर सामाजिक चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि नशे की लत से प्रभावित युवाओं के साथ उनके परिवारों को भी लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए तस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता, समय पर सहायता और पुनर्वास पर भी ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने हिमाचल और पंजाब की सरकारों से नशा विरोधी अभियान को अधिक प्रभावी बनाने तथा पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की मांग की। उनके अनुसार, दोनों राज्यों के बीच नशीले पदार्थों की आपूर्ति और आवाजाही से जुड़े मामलों में समन्वित जांच भी महत्वपूर्ण है।

भाजपा जारी रखेगी नशामुक्ति अभियान

भाजपा प्रभारी ने कहा कि पार्टी नशे के खिलाफ जनजागरण और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपना अभियान जारी रखेगी। उन्होंने दोहराया कि युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाले नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

शर्मा के बयान ने हिमाचल और पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। अब दोनों राज्य सरकारों के लिए चुनौती न केवल तस्करी पर कार्रवाई के आंकड़े प्रस्तुत करने की है, बल्कि नेटवर्क को तोड़ने, नशे की उपलब्धता घटाने और प्रभावित युवाओं को सहायता देने के ठोस परिणाम दिखाने की भी है।