
शिमला में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में कांग्रेस पर तीखा हमला, ईवीएम, एसआईआर और 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया
शिमला, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में वापसी करेगी और प्रदेश में कांग्रेस शासन का अंत होगा। रविवार को शिमला में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने, युवाओं को रोजगार देने में विफल रहने और महिलाओं से किए गए वादों पर खरा नहीं उतरने के आरोप लगाए।
सरमा ने कहा कि शिमला में पदयात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ प्रदेश की बदलती राजनीतिक मनोदशा का संकेत है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू करने का आह्वान किया। उनका दावा था कि 2027 में हिमाचल प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा।
देवभूमि हिमाचल को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि वह मां कामाख्या की धरती असम से देवी-देवताओं की पावन भूमि में आए हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से कांग्रेस सरकार के कामकाज का हिसाब मांगने और भाजपा के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने की अपील की।
ईवीएम पर कांग्रेस के रुख को लेकर सुक्खू से सवाल
असम के मुख्यमंत्री ने ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किया कि जिस चुनाव प्रणाली के जरिए कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में सत्ता तक पहुंची, उसी पर अब सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने सुक्खू के दिल्ली में ईवीएम के विरोध से जुड़े प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर भी निशाना साधा।
सरमा ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी जीत और ईवीएम पर उठाए जा रहे सवालों के बीच स्पष्टता रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, कांग्रेस जब कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतती है तो मतदान प्रणाली पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन भाजपा की जीत के बाद निर्वाचन आयोग और ईवीएम को लेकर आरोप लगाने लगती है।
उन्होंने राहुल गांधी से भी अपनी रायबरेली लोकसभा सीट से जीत और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी। सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी नतीजों को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार करने की राजनीति कर रही है।
एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए सरमा ने कहा कि मतदाता सूचियों को सही और अद्यतन रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रक्रिया का विरोध करके जनता के बीच भ्रम पैदा कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन मतदाता सूची में मौजूद अपात्र नामों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई भी जरूरी है। सरमा ने कांग्रेस से पूछा कि मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण की प्रक्रिया का विरोध करने का आधार क्या है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। सरमा ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल जनता के पास है और इसका फैसला चुनाव में मतदाता करते हैं। राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना
1 नवंबर की तारीख का उल्लेख करते हुए सरमा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
उन्होंने राहुल गांधी से मांग की कि कांग्रेस नेतृत्व को इस त्रासदी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सरमा ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करने वाली कांग्रेस को अपने इतिहास से जुड़े गंभीर सवालों का भी जवाब देना चाहिए।
असम में 1.07 लाख नौकरियों का दावा, हिमाचल के पांच लाख रोजगार पर सवाल
हिमाचल की कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए सरमा ने असम में भाजपा सरकार के रोजगार संबंधी रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि असम में उनकी सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, जबकि अब तक लगभग 1.07 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।
इसके विपरीत उन्होंने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पांच लाख रोजगार देने के चुनावी वादे पर सवाल उठाया। सरमा ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि सरकार ने अपने कार्यकाल में कितने लोगों को रोजगार दिया और पांच लाख नौकरियों के लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति हुई।
उन्होंने कहा कि असम में वादे से अधिक नौकरियां देने का दावा किया जा रहा है, जबकि हिमाचल में युवाओं को रोजगार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने सुक्खू सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
महिलाओं को आर्थिक सहायता के वादे पर भी घेरा
सरमा ने महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता के मुद्दे पर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि असम में उनकी सरकार लगभग सात लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,250 रुपये की सहायता दे रही है।
इसके साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक देने के कांग्रेस के चुनावी वादे का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश की महिलाओं को चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुरूप आर्थिक सहायता मिल रही है।
सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने युवाओं और महिलाओं की उम्मीदों के आधार पर जनादेश हासिल किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वर्गों से किए गए प्रमुख वादों को पूरा करने में अपेक्षित सफलता नहीं दिखाई।
मतपत्र से होने वाले चुनावों का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा
ईवीएम पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए सरमा ने कहा कि पार्टी को उन चुनावों के नतीजों पर भी विचार करना चाहिए, जहां मतपत्रों के माध्यम से मतदान होता है। उन्होंने हिमाचल के जिला परिषद चुनावों और विभिन्न राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा ने ऐसी चुनावी प्रक्रियाओं में भी सफलता हासिल की है।
उन्होंने कहा कि चुनावी हार का कारण मतदान प्रणाली को बताने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन, नीतियों और जनता से किए गए वादों की समीक्षा करनी चाहिए।
राम मंदिर और सरदार पटेल का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में सरमा ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कांग्रेस पर राम मंदिर के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल का संदर्भ दिया। सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण के माध्यम से सरदार पटेल के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
भाजपा कार्यकर्ताओं से 2027 के लिए जुटने का आह्वान
सरमा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता सरकार के कामकाज और चुनावी घोषणाओं का मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने बेरोजगारी, महिलाओं से किए गए वादों और जनसमस्याओं को आगामी चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से गांवों और शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों के बीच संवाद करने तथा कांग्रेस सरकार से उसकी गारंटियों का हिसाब मांगने को कहा। सरमा ने दावा किया कि प्रदेश में राजनीतिक बदलाव की जमीन तैयार हो रही है और 2027 में भाजपा सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य सत्ता हासिल करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में सुशासन, विकास और जवाबदेह प्रशासन देना है।
गुरुद्वारा साहिब से चौड़ा मैदान तक निकली पदयात्रा
भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा शिमला के पुराने लोकल बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारा साहिब पार्किंग से शुरू हुई। वहां से कार्यकर्ता विक्ट्री टनल और विधानसभा मार्ग होते हुए चौड़ा मैदान के छोटे मैदान तक पहुंचे, जहां जनसभा आयोजित की गई।
इस कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार और प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जनसभा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए। कार्यक्रम के जरिए पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान को तेज करने का संदेश दिया।






