
धर्मशाला, दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडी गठबंधन की रैली और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कांग्रेस पर जनादेश का सम्मान न करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों में घसीटने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि रामलीला मैदान की रैली में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई और बड़ी संख्या में खाली कुर्सियां कांग्रेस के कमजोर जनाधार को दर्शाती रहीं।
सुधीर शर्मा ने कहा कि देश की जनता ने लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने का जनादेश दिया है। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी हार-जीत को स्वीकार करना और जनता के फैसले का सम्मान करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
भाजपा विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक और विकास संबंधी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथे स्थान तक पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि बुनियादी ढांचे, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। साथ ही आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें विदेशी सहयोग, फंडिंग और कथित बाहरी टूलकिट के सहारे देश की प्रगति को बाधित करने तथा सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाने का प्रयास कर रही हैं।
चुनाव आयोग को निशाना बनाने पर उठाए सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधीर शर्मा ने कहा कि चुनाव आयुक्त का मुद्दा व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उनके आरोपों के मुताबिक, कांग्रेस का उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में करना है।
राहुल गांधी के उस बयान पर भी उन्होंने सवाल उठाए, जिसमें चुनावी जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक जिम्मेदारी निर्धारित करने की बात कही गई थी। सुधीर शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की आलोचना तथ्यों, प्रमाणों और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर होनी चाहिए। बिना ठोस सबूत के किसी संस्था के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाने से जनता के बीच संस्थागत व्यवस्था को लेकर अविश्वास पैदा हो सकता है।
उन्होंने कांग्रेस से यह भी पूछा कि चुनावी पराजयों के बाद पार्टी अपने संगठन और रणनीति की समीक्षा करने के बजाय बार-बार निर्वाचन आयोग को कटघरे में क्यों खड़ा करती है।
रैली में खाली कुर्सियों को लेकर कांग्रेस पर तंज
रामलीला मैदान की रैली को लेकर भाजपा विधायक ने दावा किया कि कांग्रेस ने देशभर से पार्टी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं को जुटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम में अपेक्षित जनभागीदारी दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि मैदान में खाली पड़ी कुर्सियां पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का संकेत थीं।
सुधीर शर्मा ने राहुल गांधी के सत्ता परिवर्तन संबंधी राजनीतिक रुख पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल बड़े नारे लगाने और संस्थाओं पर आरोप लगाने से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, रैली में नजर आई कम भागीदारी कांग्रेस के दावों और उसकी जमीनी राजनीतिक ताकत के बीच अंतर को उजागर करती है।
विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह
सुधीर शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल सरकार का विरोध करने तक सीमित नहीं होती। विपक्ष को रोजगार, अर्थव्यवस्था, विकास, राष्ट्रीय हित और आम नागरिकों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर ठोस नीतियों और सकारात्मक एजेंडे के साथ जनता के बीच जाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उनके मुताबिक, निरंतर नकारात्मक राजनीति से न तो जनता का भरोसा जीता जा सकता है और न ही देश की विकास यात्रा को प्रभावित किया जा सकता है।
सुधीर शर्मा के बयान से स्पष्ट है कि रामलीला मैदान की रैली और चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है।






