
मंडी। हिमाचल प्रदेश में चुनावी राजनीति और एसआईआर को लेकर कांग्रेस-भाजपा के बीच जारी जुबानी जंग के बीच मंडी में भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। पड्डल मैदान से सेरी मंच तक निकाली गई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने रैली का नेतृत्व करते हुए कांग्रेस पर चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने और राजनीतिक असहमति को अराजकता में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता का विश्वास जीतने से होकर गुजरता है, न कि चुनावी प्रक्रिया पर निराधार सवाल खड़े करने से।
सेरी मंच पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि देश विकास, सुशासन, पारदर्शिता तथा मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस जब चुनावों में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाती तो ईवीएम और चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाने लगती है। उन्होंने राहुल गांधी और विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने राजनीतिक प्रदर्शन और जनता के बीच घटते विश्वास की समीक्षा करनी चाहिए।
एसआईआर यानी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का बचाव करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है, ताकि किसी योग्य मतदाता का नाम न कटे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इससे कथित तौर पर फर्जी और दोहराव वाली प्रविष्टियों की पहचान हो रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धीकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दिल्ली में एसआईआर के विरोध में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी जयराम ठाकुर ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं उसी चुनावी व्यवस्था के माध्यम से संवैधानिक पद पर पहुंचे हैं, जिसकी निष्पक्षता पर उनकी पार्टी के नेता सवाल उठा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है तो उन्हें अपने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने इसे कांग्रेस के राजनीतिक रुख में विरोधाभास करार दिया।
अपने संबोधन में जयराम ठाकुर ने कांग्रेस पर देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी के संदर्भ में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था की तुलना किसी अन्य देश की राजनीतिक परिस्थितियों से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत संविधान के अनुसार चलता है और यहां सरकारें जनता के मतों से बनती हैं। गांधी परिवार या किसी राजनीतिक दल की धमकियों से देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस नेताओं की कथित अभद्र टिप्पणियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और लोकतांत्रिक शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, जनता अब नकारात्मक राजनीति और भ्रामक प्रचार के बजाय जवाबदेही तथा विकास के मुद्दों पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन कर रही है।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को भी निशाने पर लेते हुए विकास कार्यों की गति, चुनावी गारंटियों और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भारी कर्ज लेने के बावजूद विकास परियोजनाओं को अपेक्षित गति नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले जनता से कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन गारंटियों को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है। नए जिलों के गठन को लेकर सरकार की चर्चाओं पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि केवल प्रशासनिक इकाइयों की संख्या बढ़ाने से प्रदेश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
अपने भाषण में उन्होंने रामपुर के विधायक के निधन के समय मुख्यमंत्री की गतिविधियों को लेकर भी आपत्ति जताई और इसे असंवेदनशीलता करार दिया। यह आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील अवसर पर मुख्यमंत्री को राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजाय शोकाकुल परिवार तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहिए था।
जयराम ठाकुर ने कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर को मंत्री बनाए जाने संबंधी मुख्यमंत्री की घोषणा पर भी तंज कसा। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की एक और अधूरी राजनीतिक घोषणा बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता अब वादों से अधिक उनके क्रियान्वयन का हिसाब मांग रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा मंडी जिले की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल करेगी और प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियां उसके लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं।
पदयात्रा और जनसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर तथा भाजपा विधायक और रैली संयोजक राकेश जम्वाल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में भाजपा महामंत्री पायल वैद्य, विधायक विनोद कुमार, इंद्र सिंह गांधी, दलीप ठाकुर, पूर्ण चंद, दीपराज, लोकेंद्र कुमार, मंडी जिला भाजपा अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा और सुंदरनगर के नेता हीरालाल सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मंडी की इस पदयात्रा के जरिए भाजपा ने एक ओर एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर हिमाचल की सुक्खू सरकार के खिलाफ वित्तीय प्रबंधन, विकास और चुनावी वादों को लेकर अपना हमला तेज किया। साफ है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष अब केवल विकास के दावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, शासन की जवाबदेही और चुनावी नैरेटिव भी सियासी बहस के प्रमुख मुद्दे बनने जा रहे हैं।






