मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के बड़े दायरे में धकेल दिया है। हाल के दिनों में हुए हमलों, मिसाइल परीक्षणों और नौसैनिक कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में यह संघर्ष और अधिक व्यापक और विनाशकारी हो सकता है।

सबसे बड़ा घटनाक्रम हिंद महासागर में सामने आया, जहां अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट गाले से लगभग 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कुछ नाविकों को बचाया गया और कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस युद्धपोत पर करीब 180 लोग सवार थे। जहाज भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद ईरान लौट रहा था, जब इसे अमेरिकी पनडुब्बी ने निशाना बनाया। हमले के बाद जहाज ने संकट संदेश भेजा, लेकिन कुछ ही मिनटों में वह समुद्र में समा गया।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने इसे “शांत लेकिन घातक वार” बताया और संकेत दिया कि आने वाले समय में ईरान के खिलाफ और भी सैन्य कार्रवाई हो सकती है।
इस बीच इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली वायुसेना लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल ठिकानों और रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रही है। राजधानी तेहरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई ठिकानों पर बमबारी की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही लेबनान की सीमा पर भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजरायली सेना ने सीमावर्ती इलाकों में जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है। ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल के हमलों का कड़ा जवाब देगा। हाल के दिनों में ईरान ने कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनका निशाना इजरायल और उसके सहयोगी देश रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र में कई अरब देशों की सेनाएं भी अलर्ट पर हैं और कुछ देशों ने अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिका ने अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल मिनटमैन-III का परीक्षण भी किया है। यह मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस परीक्षण का उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि अमेरिका किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा परमाणु क्षमता वाली मिसाइल का परीक्षण और हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबोना, दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि युद्ध अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रह सकता। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष पश्चिम एशिया से निकलकर एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र तक फैल सकता है।
इस पूरे संकट के कारण वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इस युद्ध का असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। जिस तरह से बड़े सैन्य हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है और नए-नए मोर्चे खुल रहे हैं, उससे यह आशंका बढ़ रही है कि आने वाले दिनों में इस संघर्ष में और अधिक जान-माल का नुकसान हो सकता है और दुनिया को एक लंबे और विनाशकारी युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।





