हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों की लंबित देनदारियों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। अपनी मांगों को लेकर Himachal Pradesh Pensioners Sanyukt Sangharsh Samiti के बैनर तले सैकड़ों पेंशनरों ने सोमवार को Shimla में उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर राज्य सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी बजट में उनकी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया तो 30 मार्च को बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल पेंशनरों का कहना था कि प्रदेश सरकार के पास उनकी कई वित्तीय देनदारियां वर्षों से लंबित पड़ी हैं, जिनका अब तक भुगतान नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि लंबे समय से सरकार से इस संबंध में लगातार मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
पेंशनरों ने कहा कि राज्य का बजट 21 मार्च को विधानसभा में प्रस्तुत किया जाना है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि इसमें उनकी मांगों के समाधान के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 30 मार्च को प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पेंशनर राजधानी शिमला पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यदि सरकार ने बजट में उनकी मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 15 से 20 हजार पेंशनर शामिल हो सकते हैं।
पेंशनरों ने यह भी बताया कि 1 जनवरी 2016 से लेकर वर्ष 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की कई वित्तीय देनदारियां अब तक लंबित हैं। इसके अलावा पुराने पेंशनरों से संबंधित अन्य कई भुगतान भी सरकार की ओर से जारी नहीं किए गए हैं, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हुए उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि वर्षों तक प्रदेश की सेवा करने के बाद अब पेंशनरों को अपने ही हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो चिंताजनक स्थिति है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि यदि हजारों पेंशनर राजधानी में एक साथ आंदोलन करते हैं तो इससे राज्य सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अब सबकी निगाहें 21 मार्च को पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि सरकार पेंशनरों की मांगों को किस हद तक पूरा करती है।






