मानवता को शर्मसार करती तस्वीर: जब समाज का एक व्यक्ति आगे आया, तो व्यवस्था और राजनीति क्यों रही खामोश?

सिरमौर जिले की शिलाई पंचायत के अच्छोटी गांव से सामने आई यह घटना केवल दो बेसहारा भाई-बहन की कहानी नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और राजनीतिक तंत्र पर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। 42 वर्षीय दौलत राम और उनकी 37 वर्षीय बहन निशा पिछले करीब छह वर्षों से बेहद दयनीय और अमानवीय परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर थे। माता-पिता के निधन के बाद दोनों मानसिक रूप से अस्वस्थ भाई-बहन एक जर्जर और टूटे-फूटे मकान में अकेले रह रहे थे।

बताया गया कि मकान की छत तक टूटी हुई थी और घर के भीतर चारों ओर गंदगी फैली हुई थी। हालत इतनी खराब थी कि देखभाल करने वाला कोई न होने के कारण दोनों भाई-बहन घर के अंदर ही शौच करने को मजबूर थे। कई बार पड़ोसी खाना दे देते तो उनका पेट भर जाता, अन्यथा उन्हें भूखे ही रात गुजारनी पड़ती थी।

इस दर्दनाक स्थिति की सूचना मिलने के बाद समाजसेवी संजय शर्मा अपनी टीम और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेने के बाद एसडीएम शिलाई श्री जसपाल सिंह और सीडीपीओ श्रीमती गीता सिंघटा के सहयोग से दोनों भाई-बहन को रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित “अपना घर आश्रम” शामली भेजा गया, जहां अब उनका इलाज और देखभाल की जाएगी।

यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है कि जब एक आम नागरिक और समाजसेवी मानवता के लिए इतना बड़ा कदम उठा सकता है, तो फिर सरकारों, राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों की जिम्मेदारी कहां चली जाती है? चुनावों और राजनीति में जनता की बात करने वाले लोग क्या कभी ऐसे बेसहारा लोगों तक भी पहुंचते हैं? समाज में आज भी ऐसे हजारों लोग हैं, जिन्हें केवल सहारे, इलाज और संवेदनशीलता की जरूरत है।

यह घटना यह भी साबित करती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि समाज के साथ-साथ सरकार और राजनीतिक व्यवस्था भी ऐसे लोगों की पीड़ा को अपनी प्राथमिकता बनाए।