सीएम सुक्खू का बड़ा प्रशासनिक फैसला: हिमाचल में IAS, IFS और IPS कैडर घटाने की तैयारी

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को अधिक छोटा, प्रभावी और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के स्वीकृत पदों की संख्या में कटौती करने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री सुक्खू का तर्क है कि हिमाचल जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्य को इतना बड़ा शीर्ष प्रशासनिक ढांचा बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक पदों और उनसे जुड़े खर्चों को तर्कसंगत बनाकर बचने वाली राशि को विकास और जनकल्याण के कार्यों में लगाया जा सकता है।

IAS कैडर में 23 पद कम करने का प्रस्ताव

राज्य सरकार केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश के IAS कैडर के 23 स्वीकृत पद कम करने की मंजूरी मांगेगी। मौजूदा 153 स्वीकृत पदों की संख्या घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है।

इससे राज्य के IAS कैडर में करीब 15 प्रतिशत की कमी आएगी।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इससे भी आगे की राय व्यक्त करते हुए कहा है कि हिमाचल जैसे राज्य में IAS अधिकारियों की संख्या को भविष्य में 100 से 110 के आसपास सीमित किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार ने केंद्र के समक्ष 130 पदों का ही प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया है।

यह फैसला केवल पदों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री सुक्खू के उस प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें सरकार कम खर्च में अधिक प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था तैयार करने पर जोर दे रही है।

सरकार पर करीब 200 करोड़ रुपये सालाना का बोझ

राज्य सरकार के आकलन के अनुसार IAS, IPS और IFS अधिकारियों के मौजूदा बड़े कैडर को बनाए रखने में सालाना करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च आता है।

यह खर्च केवल अधिकारियों के वेतन तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी आवास, वाहन, निजी एवं सहायक स्टाफ तथा अन्य प्रशासनिक सुविधाओं पर होने वाला व्यय भी शामिल है।

अधिकारियों के अनुसार एक IAS या IFS अधिकारी पर प्रत्यक्ष और संबंधित प्रशासनिक सुविधाओं को मिलाकर औसतन 45 से 50 लाख रुपये सालाना तक खर्च हो सकता है।

ऐसे में सरकार का तर्क है कि प्रशासनिक ढांचे को आवश्यकता के अनुरूप करने से राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है।

IFS कैडर में 35 पद घटाने की तैयारी

IAS के साथ-साथ राज्य सरकार भारतीय वन सेवा के कैडर में भी बड़ी कटौती का प्रस्ताव तैयार कर रही है।

मौजूदा 118 स्वीकृत IFS पदों को घटाकर 83 करने का प्रस्ताव है। यानी IFS कैडर में 35 पदों की कमी की योजना है।

IPS कैडर भी इस समीक्षा से बाहर नहीं है। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 96 स्वीकृत IPS पद हैं और सरकार इनमें भी कटौती की तैयारी कर रही है। हालांकि IPS के लिए संशोधित संख्या अभी अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।

सुक्खू सरकार के लिए खर्च और विकास के बीच संतुलन की कोशिश

मुख्यमंत्री सुक्खू का यह कदम ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश सरकार लगातार वित्तीय दबाव और सीमित संसाधनों के बीच विकास कार्यों को गति देने की कोशिश कर रही है।

सरकार का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे का आकार जरूरत के मुताबिक होना चाहिए और अनावश्यक रूप से बड़े स्थायी खर्च से बचते हुए उपलब्ध धन को जनता से जुड़े क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए।

सरकार के अनुसार कैडर को तर्कसंगत बनाने से बचने वाले संसाधनों का इस्तेमाल विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है।

क्या कम अधिकारी, बेहतर प्रशासन दे सकते हैं?

सुक्खू सरकार के प्रस्ताव का मूल सवाल यही है कि क्या छोटे राज्य के लिए छोटा लेकिन अधिक प्रभावी प्रशासनिक ढांचा बेहतर साबित हो सकता है।

सरकार का मानना है कि अधिकारियों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासन की कार्यक्षमता, जवाबदेही और परिणाम देने की क्षमता है। प्रस्तावित बदलाव इसी सोच पर आधारित बताया जा रहा है।

हालांकि IAS, IPS और IFS जैसे अखिल भारतीय सेवाओं के स्वीकृत कैडर में बदलाव केंद्र की मंजूरी के बाद ही संभव होगा। इसलिए आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर केंद्र और राज्य के बीच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो यह हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार इसे प्रशासनिक खर्च कम करने, संसाधनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में लगाने और राज्य की वित्तीय स्थिति को अधिक टिकाऊ बनाने की अपनी व्यापक नीति का हिस्सा मान रही है।