पंजाब में दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सामने आई ताजा सरकारी जांच रिपोर्ट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोगों की थाली और बच्चों के गिलास तक पहुंच रहा दूध कितना सुरक्षित है। पंजाब फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की हालिया जांच में बड़ी संख्या में दूध के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद मिलावटखोरी के नेटवर्क और डेयरी कारोबार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
विभाग द्वारा राज्यभर में डेयरियों, दूध संग्रह केंद्रों और प्रोसेसिंग यूनिट्स से कुल 204 सैंपल एकत्र किए गए थे। जब इन नमूनों की लैब में जांच की गई तो रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रख दी। जांच में 68 सैंपल फेल पाए गए, यानी लगभग हर तीसरा सैंपल गुणवत्ता और सुरक्षा के मानकों पर खरा नहीं उतर सका। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी गड़बड़ी का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट है।
सबसे अधिक चिंता उस मामले ने बढ़ाई जिसमें एक दूध का सैंपल पूरी तरह असुरक्षित पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार वह दूध मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं था और उसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते थे। इस खुलासे के बाद राज्यभर में लोगों के बीच भय और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही हैं, क्योंकि दूध को आमतौर पर सबसे जरूरी और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
फूड सेफ्टी अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटखोर अधिक मुनाफा कमाने के लिए दूध की मात्रा और गाढ़ापन बढ़ाने हेतु खतरनाक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। पानी मिलाना तो लंबे समय से आम शिकायत रही है, लेकिन अब सिंथेटिक केमिकल, डिटर्जेंट, स्टार्च, यूरिया और अन्य रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे तत्व दूध को देखने में गाढ़ा और सफेद जरूर बना देते हैं, लेकिन वास्तव में यह शरीर के लिए धीमे जहर की तरह काम कर सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार मिलावटी दूध का सेवन बच्चों की शारीरिक वृद्धि और प्रतिरोधक क्षमता पर गंभीर असर डाल सकता है। पेट और आंतों के संक्रमण, लीवर से जुड़ी समस्याएं, किडनी पर दबाव और लंबे समय में शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक मिलावट वाले खाद्य पदार्थों का असर धीरे-धीरे सामने आता है, इसलिए कई बार लोग बीमारी की असली वजह तक समझ नहीं पाते।
चिंता की बात यह भी है कि दूध केवल पीने तक सीमित नहीं है। यही दूध आगे चलकर पनीर, दही, घी, मिठाइयों और अन्य डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होता है। ऐसे में यदि मूल कच्चा दूध ही मिलावटी या दूषित है तो उससे तैयार होने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा भी प्रभावित होना तय है। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक उत्पाद की समस्या नहीं बल्कि पूरी डेयरी सप्लाई चेन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार दूध में गड़बड़ियों के सामने आने के बाद अब पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की भी व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। राज्यभर में विशेष अभियान के तहत पनीर के नमूने लिए जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि मिलावट का यह नेटवर्क कितना व्यापक है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने वाले डेयरी संचालकों और यूनिट मालिकों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब जैसे कृषि और डेयरी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध राज्य में इस प्रकार की रिपोर्ट केवल खाद्य सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि उपभोक्ता विश्वास का भी बड़ा संकट है। दूध भारतीय परिवारों में रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है और यदि लोग उसी की शुद्धता को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगें तो यह सामाजिक और स्वास्थ्य दोनों स्तरों पर गंभीर स्थिति बन सकती है।
खाद्य सुरक्षा कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल छापेमारी और सैंपलिंग पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए नियमित निगरानी, मजबूत लैब प्रणाली, स्थानीय स्तर पर सख्त निरीक्षण और उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही छोटे डेयरी कारोबारियों को सुरक्षित और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण देना भी जरूरी माना जा रहा है।
पंजाब में सामने आई यह रिपोर्ट एक बार फिर उस कठोर सच्चाई की याद दिलाती है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे समय में जब लोग अपने बच्चों के बेहतर पोषण और सुरक्षित भोजन को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं, तब दूध जैसे बुनियादी खाद्य पदार्थ में मिलावट की खबरें समाज के लिए गंभीर चेतावनी बनकर उभरी हैं।





