युवाओं के मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा, सुक्खू बोले—हिमाचल में जनता का भरोसा कांग्रेस के साथ, 2027 में फिर बनेगी सरकार

शिमला:

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आए पेपर लीक मामलों और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं ने देश के लाखों युवाओं के सपनों को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश की जनता का भरोसा वर्तमान कांग्रेस सरकार पर लगातार मजबूत हुआ है और वर्ष 2027 में राज्य की जनता कांग्रेस को दोबारा सत्ता सौंपकर नया राजनीतिक इतिहास रचेगी।

मुख्यमंत्री शिमला स्थित राजीव भवन में युवा कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ युवा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को संवारने के लिए कठिन परिश्रम कर रहा है, लेकिन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए कथित पेपर लीक मामलों ने मेहनती छात्रों और उनके परिवारों की उम्मीदों को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली पर ही नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर भी गहरा आघात करती हैं।

सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सामने आए नीट परीक्षा विवाद सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को लगातार उठाती रही है और युवाओं के अधिकारों तथा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की पक्षधर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भी अतीत में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का सामना कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से हजारों युवाओं की वर्षों की मेहनत प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग से जुड़े विवादों ने भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया था। सुक्खू ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने तत्कालीन चयन आयोग को भंग कर भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था विकसित की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित हो, ताकि युवाओं का विश्वास सरकारी संस्थाओं में बना रहे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अग्निवीर योजना को भी युवाओं के हितों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश का देश की सैन्य परंपरा में विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों युवाओं ने भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा की है और अनेक वीरता पुरस्कार अर्जित किए हैं। उनके अनुसार नई भर्ती व्यवस्था के लागू होने से सेना में पारंपरिक भर्ती का स्वरूप बदला है, जिससे राज्य के युवाओं में भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हुआ है।

सुक्खू ने कहा कि पहले सेना में नियमित भर्ती के माध्यम से युवाओं को दीर्घकालिक सेवा का अवसर मिलता था, जबकि वर्तमान व्यवस्था में चार वर्ष बाद सेवा समाप्त होने की व्यवस्था युवाओं के भविष्य को लेकर कई प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विषय पर लगातार अपनी आपत्ति दर्ज कराती रही है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजनाओं को कमजोर करने, राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद करने तथा अन्य वित्तीय निर्णयों का असर हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता यदि भविष्य में सत्ता में आते हैं तो पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को समाप्त करने की बात कर रहे हैं, जिससे सरकारी कर्मचारियों में स्वाभाविक चिंता है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी है और पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर अपने चुनावी वादे को पूरा किया। उनका कहना था कि सरकार जनहित और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े निर्णयों पर लगातार आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की जनता पिछले ढाई वर्षों के दौरान सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का सकारात्मक मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने कहा कि लोगों का भरोसा कांग्रेस सरकार पर लगातार मजबूत हुआ है और यही विश्वास आगामी विधानसभा चुनावों में भी दिखाई देगा।

युवा सम्मेलन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भी युवाओं से जुड़े मुद्दों, पारदर्शी भर्ती प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र प्रतिनिधि तथा पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राजनीतिक दृष्टि से इस सम्मेलन को कांग्रेस द्वारा युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और रोजगार, शिक्षा तथा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आगामी चुनावी विमर्श का केंद्र बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के संबोधन से स्पष्ट संकेत मिला कि कांग्रेस आने वाले समय में युवाओं के मुद्दों को राज्य की राजनीति में प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रही है।