हिमाचल प्रदेश सरकार ने समाज के सबसे कमजोर और अब तक सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रह गए परिवारों तक सीधे पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अपना परिवार, सुखी परिवार योजना’ के तहत 6, 7 और 8 अगस्त को प्रदेशभर में ब्लॉक स्तर पर विशेष जन-संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि अति निर्धन परिवारों की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके अनुरूप सरकारी नीतियां तैयार करना भी होगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब विकास की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर उन परिवारों तक स्वयं पहुंचेगी, जो वर्षों से सरकारी सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र परिवार केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक कारणों से अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन दिवसीय जन-संवाद कार्यक्रम ब्लॉक स्तर पर आयोजित होंगे, जिनकी अध्यक्षता संबंधित क्षेत्र के विधायक करेंगे। कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए ग्राम पंचायतों के क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक क्लस्टर के अंतर्गत अधिकतम 10 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चिन्हित अति निर्धन परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा, ताकि सरकार सीधे उनके अनुभव, समस्याएं और अपेक्षाएं सुन सके।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल औपचारिक संवाद तक सीमित नहीं रहेगी। कार्यक्रमों के दौरान प्राप्त सुझावों और फीडबैक के आधार पर सरकार नई योजनाओं का प्रारूप तैयार करेगी और उन्हें धरातल पर लागू करेगी। उनका मानना है कि विकास की योजनाएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब वे वास्तविक जरूरतों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास विभाग ने व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से प्रदेश में लगभग 1.78 लाख अति निर्धन परिवारों की पहचान की है। यह प्रक्रिया आठ चरणों में पूरी की गई और इसमें पारदर्शिता तथा जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से जुड़े अधिकारियों को भी इस पूरी प्रक्रिया के लिए जवाबदेह बनाया गया, ताकि किसी पात्र परिवार के साथ अन्याय न हो।
उन्होंने यह भी बताया कि सर्वेक्षण के दौरान एक चिंताजनक तथ्य सामने आया कि प्रदेश में लगभग 85 हजार ऐसे परिवार हैं, जो अत्यंत निर्धन होने के बावजूद आज तक बीपीएल श्रेणी में शामिल नहीं किए गए। परिणामस्वरूप वे राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब ऐसे परिवारों को योजनाओं की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है।
सुक्खू ने कहा कि ‘अपना परिवार, सुखी परिवार योजना’ की घोषणा चालू वित्त वर्ष के बजट में की गई थी और अब इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इन परिवारों की आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की समृद्धि तभी संभव है, जब समाज का सबसे कमजोर वर्ग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़े। यदि अति निर्धन परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार आता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास पर दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार केवल व्यवस्था की खामियों के कारण पीछे न रह जाए।
बैठक के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सी. पालरासु, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार का यह अभियान हिमाचल प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि जन-संवाद के माध्यम से प्राप्त सुझावों को प्रभावी नीतियों और समयबद्ध क्रियान्वयन में बदला जाता है, तो यह योजना न केवल हजारों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बदलाव ला सकती है, बल्कि राज्य में समावेशी और सहभागी विकास की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती है।





