शिमला।
हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरे रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही भारी वर्षा ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने 31 जुलाई के लिए कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन ने भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है, क्योंकि लगातार बारिश के चलते भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जलभराव की घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 30 जुलाई के लिए चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। वहीं कुल्लू, शिमला, सिरमौर और किन्नौर जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन, नदियों और नालों के जलस्तर में तेज़ वृद्धि तथा निचले इलाकों में जलभराव जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। पालमपुर में सबसे अधिक 133 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि जोगिंदरनगर में 112 मिलीमीटर, कांगड़ा में 104 मिलीमीटर और धर्मशाला में 82 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा रामपुर में 45 मिलीमीटर, गुलेर में 42.2 मिलीमीटर तथा जोट में 41 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। लगातार हो रही बारिश से कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और पहाड़ी इलाकों में जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है।
मौसम विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि नदी-नालों, खड्डों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा केवल प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक चेतावनियों का ही पालन करें। जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और यात्रा से पहले सड़क मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने की भी सलाह दी गई है।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाओं के कारण प्रदेशभर में 152 सड़कें बंद हो गई हैं। सबसे अधिक 57 सड़कें मंडी जिले में अवरुद्ध हैं। चंबा में 33, कुल्लू में 31, शिमला में 14, ऊना में दो तथा लाहौल-स्पीति में एक सड़क यातायात के लिए बंद है। सड़क संपर्क बाधित होने से कई ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है और राहत एवं मरम्मत कार्य लगातार जारी हैं।
बारिश का असर केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं है। राज्य में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। 68 जलापूर्ति योजनाएं बाधित होने से कई क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति बन गई है। वहीं 72 बिजली ट्रांसफॉर्मरों के प्रभावित होने से अनेक गांवों और कस्बों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित हुई है। संबंधित विभागों की टीमें बहाली कार्य में जुटी हुई हैं, हालांकि लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में चुनौती बनी हुई है।
मौसम के बदलते मिजाज का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। चंबा जिले का भरमौर प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र रहा, जहां न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दूसरी ओर ऊना सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
इस मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। एक से 29 जुलाई के बीच हिमाचल प्रदेश में औसतन 258.2 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 238.6 मिलीमीटर है। यानी इस वर्ष अब तक लगभग आठ प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सक्रिय बने मानसून के कारण आगामी दिनों में भी संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।
प्रशासन ने जिला अधिकारियों, आपदा प्रबंधन इकाइयों और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम की गंभीरता को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर पहाड़ी मार्गों और नदी-नालों के आसपास जाने से परहेज़ करें। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 24 से 48 घंटे प्रदेश के कई हिस्सों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।





