शिमला । हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रगीत को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर विपक्ष के खिलाफ गलत आरोप लगाकर विधानसभा और प्रदेश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि सामने आए वीडियो से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस नेतृत्व को अपने आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
भाजपा ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर विपक्ष ने सदन की परंपराओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा उठाया था। पार्टी के अनुसार, विपक्ष के विधायकों ने राष्ट्रगान के दौरान अपनी जगह पर खड़े होकर पूरे सम्मान के साथ भाग लिया था। इसके बाद राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके गायन को लेकर भी अपनी बात रखी गई।
भाजपा का आरोप है कि इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश की गई और विपक्ष के विधायकों पर राष्ट्रगीत के अपमान जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाजपा ने कहा कि अब सामने आए वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को लेकर उसकी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के अनुसार, वीडियो में ऐसा कोई तथ्य दिखाई नहीं देता जिससे विपक्षी विधायकों द्वारा राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप साबित हो। भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की राजनीतिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया।
पार्टी का कहना है कि विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी बात संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत रखी थी। भाजपा के मुताबिक, सदन में उठाए गए सवालों और नियमों का हवाला देने को राष्ट्रगीत के अपमान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
भाजपा ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार पहले भी विपक्ष और भाजपा की योजनाओं को लेकर ऐसे आरोप लगाती रही है, जिन पर बाद में सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी का आरोप है कि भाजपा को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए सरकार द्वारा लगातार ऐसी बयानबाजी की जा रही है।
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों देश की राष्ट्रीय भावना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक हैं और उनका सम्मान सभी राजनीतिक दलों तथा जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। पार्टी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है तथा इसके सम्मान को किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाजपा ने कांग्रेस के उस तर्क पर भी सवाल उठाया कि पार्टी के भीतर लिए गए निर्णयों के आधार पर राष्ट्रीय परंपराओं की व्याख्या की जा सकती है। पार्टी का कहना है कि देश संविधान, कानून और स्थापित संवैधानिक एवं संसदीय परंपराओं के आधार पर चलता है और किसी भी राजनीतिक संगठन का निर्णय इनसे ऊपर नहीं हो सकता।
विपक्षी भाजपा ने मांग की है कि यदि उसके विधायकों पर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत साबित होते हैं तो सरकार को इस पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए। पार्टी ने कहा कि विधानसभा के भीतर लगाए गए गंभीर आरोपों का जवाब भी उसी मंच पर दिया जाना चाहिए, जहां से वे लगाए गए थे।
इस पूरे विवाद ने हिमाचल विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को एक बार फिर सामने ला दिया है। भाजपा अब इस मुद्दे को केवल राष्ट्रगीत के सम्मान तक सीमित न रखते हुए इसे सरकार की राजनीतिक कार्यशैली और विपक्ष के प्रति उसके रवैये से जोड़ रही है।
भाजपा का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीति से ऊपर है और इस विषय पर किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या आरोप प्रदेश की जनता के सामने नहीं रखे जाने चाहिए। पार्टी ने सरकार से विवाद को स्पष्ट करने और विपक्ष पर लगाए गए आरोपों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।






