हरियाणा सरकार कारागार व्यवस्था को केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसे सुधार और पुनर्वास के आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीक्षांत समारोह के दौरान बताया कि प्रदेश की जेलों में डिजिटलाइजेशन, ई-जेल प्रणाली, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कौशल विकास कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।
प्रदेश की जेलों में बंदियों की एंट्री से लेकर रिहाई तक की प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत है। कैदियों की अदालतों में पेशी के लिए सैकड़ों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है। जेलों में लाइब्रेरी, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं ताकि बंदी सजा पूरी होने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सरकार ने पांच जेलों में आईटीआई और पॉलिटेक्निक कोर्स शुरू किए हैं और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एमओयू भी किया गया है। बंदियों के रोजगार के लिए आठ जेलों में पेट्रोल पंप खोले गए हैं, जबकि चार और जेलों में जल्द पेट्रोल पंप शुरू किए जाएंगे।
जेल सुरक्षा को लेकर भी सरकार सतर्क है। अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल जैमर और उच्च सुरक्षा जेलों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा की जेलें देश में सुधारात्मक कारागार व्यवस्था का मॉडल बनें, जहां सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन कायम हो।





