हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अजय अत्री की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और आगामी अभियानों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सीएमओ कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुनील वर्मा, डॉ पारस और डॉ नेहा पटियाल सहित सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, जिला सूचना एवं सम्प्रेषण अधिकारी सुनील रांगड़ा, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, लेखाकार और ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस उन स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर रहा, जो सीधे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण समुदायों से जुड़े हैं।
बैठक के दौरान डॉ अजय अत्री ने विशेष रूप से एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान की समीक्षा की और निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो बच्चे अब तक टीकाकरण अभियान से छूट गए हैं, उन्हें चिन्हित कर जल्द से जल्द कवर किया जाए। उन्होंने इसे भविष्य में गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बैठक में गंभीरता दिखाई गई। डॉ अत्री ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें स्वास्थ्य योजनाओं और नियमित चिकित्सा निगरानी का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पंजीकरण से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं दोनों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी संभव हो पाती है।
बैठक में एचबीएनसी (होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर) कार्यक्रम पर भी विशेष जोर दिया गया। डॉ अत्री ने बताया कि आशा कार्यकर्ता नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए घर-घर जाकर सात निर्धारित विजिट करती हैं, जिनका उद्देश्य शिशु और मां दोनों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन दौरों को शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी नवजात को शुरुआती स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहना पड़े।
महिलाओं और बच्चों में बढ़ते एनीमिया और पोषण संबंधी समस्याओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में कहा गया कि ग्रामीण और स्कूल स्तर पर पोषण जागरूकता और स्वास्थ्य जांच को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। डॉ अत्री ने आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीमों को निर्देश दिए कि वे स्कूलों और आंगनबाड़ियों में स्वास्थ्य निरीक्षण के दौरान एनीमिया से प्रभावित बच्चों को चिन्हित कर आगे जांच और उपचार के लिए रेफर करें।
उन्होंने बच्चों में दृष्टि दोष, सुनने की समस्या और दांतों से जुड़ी बीमारियों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि शुरुआती अवस्था में इन समस्याओं की पहचान बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
बैठक में कुष्ठ रोग उन्मूलन, क्षय रोग नियंत्रण, तंबाकू मुक्त हिमाचल अभियान, मुस्कान योजना, हिमकेयर योजना, आयुष्मान भारत योजना और माहवारी स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोग भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
आगामी 28 जून 2026 को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस को लेकर भी बैठक में विशेष रणनीति तैयार की गई। डॉ अत्री ने कहा कि खंड स्तर पर अभी से तैयारियां शुरू कर दी जाएं और विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर फोकस किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पोलियो अभियान के दौरान किसी भी बच्चे को छूटने न दिया जाए।
गर्मियों के मौसम को देखते हुए जलजनित रोगों, मलेरिया, डेंगू और गैर संचारी रोगों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया कि बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य सतर्कता और जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गांवों और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता, साफ पेयजल और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर अभियान तेज किए जाएं।
यह समीक्षा बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि जिला स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों और प्राथमिकताओं का व्यापक आकलन भी थी। स्वास्थ्य विभाग अब आने वाले महीनों में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर अधिक सक्रिय रणनीति के साथ काम करता दिखाई देगा।





