मई में भी नहीं थम रहा मौसम का कहर: हिमाचल में ओलावृष्टि, बारिश और तूफान से जनजीवन प्रभावित, बागवानों की बढ़ी चिंता

हिमाचल प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदलता जा रहा है और इसका सीधा असर आम जनजीवन, खेती-बाड़ी और बागवानी पर पड़ रहा है। जिस मई महीने में आमतौर पर गर्मी बढ़ने लगती है, उस समय प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। बदलते मौसम ने न केवल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि किसानों और बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है। खासकर सेब उत्पादक क्षेत्रों में हो रही ओलावृष्टि फसलों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

बुधवार को राजधानी शिमला समेत प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि अनेक क्षेत्रों में जमकर ओलावृष्टि हुई। शिमला के फागू और रोहड़ू, हमीरपुर के सुजानपुर, सिरमौर के राजगढ़ तथा मंडी की सराज घाटी में ओलों ने सेब, मटर, टमाटर और अन्य नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर बागवानों ने बताया कि तैयार हो रही फसलें ओलों की मार से प्रभावित हुई हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान सिरमौर जिले के संगड़ाह में सबसे अधिक 31 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिमला में 17.6 मिलीमीटर, नाहन में 13.2, बरठीं में 6.2, सराहन में 5.5, जबकि सोलन और पालमपुर में 5.2-5.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट आई है और लोगों को मई में भी ठंड का अहसास हो रहा है।

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक 7 मई तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। हालांकि 8 से 10 मई तक मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है, लेकिन 11 और 12 मई को एक बार फिर कई क्षेत्रों में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। विभाग ने लोगों, खासकर पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वालों को सतर्क रहने की अपील की है।

इस बार मई महीने में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक सामान्य से 35 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हो चुकी है। कई जिलों में यह बढ़ोतरी बेहद असामान्य स्तर तक पहुंच गई है। हमीरपुर में 257 प्रतिशत, कांगड़ा में 235 प्रतिशत, मंडी में 232 प्रतिशत, शिमला में 309 प्रतिशत, सिरमौर में 348 प्रतिशत, ऊना में 331 प्रतिशत और सोलन में 346 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के इस असामान्य बदलाव का असर आने वाले समय में कृषि और बागवानी क्षेत्र पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। लगातार बदलते जलवायु चक्र ने हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। किसानों और बागवानों का कहना है कि यदि इसी तरह मौसम का मिजाज बना रहा, तो फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रह गया, बल्कि इसका असर सीधे लोगों की आजीविका और रोजमर्रा के जीवन पर दिखाई देने लगा है।