हिमाचल में पोषण सुधार को लेकर बड़ा समन्वय अभियान, विभागों और कृषि विश्वविद्यालयों ने मिलकर बनाई नई रणनीति

हिमाचल प्रदेश में पोषण, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से 5 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता डॉ. एस. पी. कटयाल ने की, जिसमें विभिन्न विभागों, कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों तथा पोषण विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रही पोषण और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और क्षमता निर्माण को मजबूत करना था।

बैठक में चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर राज्य में पोषण सुधार की दिशा में ठोस सुझाव दिए।

बैठक की शुरुआत में डॉ. एस. पी. कटयाल ने कहा कि कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच मजबूत तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर कार्य करें, तो राज्य में पोषण स्तर को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि योजनाओं की सफलता केवल नीति निर्माण से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है।

बैठक में विशेष रूप से स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने मिड-डे मील कर्मचारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्कूल स्टाफ के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया। माना गया कि यदि इन कर्मचारियों को आधुनिक पोषण मानकों, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जाए, तो बच्चों और महिलाओं तक बेहतर पोषण सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

इस दौरान पौष्टिक भोजन की नई रेसिपी, संतुलित मेन्यू योजना और खाद्य स्वच्छता मानकों के पालन पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों और महिलाओं को केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि भोजन पौष्टिक, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक हो। इसी सोच के तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज, फल और सब्जियों को भोजन योजनाओं में शामिल करने पर भी बल दिया गया।

बैठक में “न्यूट्री-गार्डन” यानी पोषण वाटिकाओं की स्थापना और विस्तार को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने रखा गया। इस योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) के माध्यम से गांवों और स्कूलों में छोटे-छोटे पोषण उद्यान विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि लोगों को ताजा और पौष्टिक फल-सब्जियां आसानी से उपलब्ध हो सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

बैठक में तकनीकी सहयोग, संसाधनों के साझा उपयोग और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में भी सहमति बनी। यह महसूस किया गया कि यदि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और सरकारी विभागों की योजनाओं को एक मंच पर लाया जाए, तो हिमाचल प्रदेश में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर कृषि, पोषण, खाद्य विज्ञान और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. अमित विक्रम, डॉ. चंद्रकांता, धर्मेंद्र चौहान, डॉ. सीमा ठाकुर, सुजाता ठाकुर, डॉ. रंजना वर्मा, शिखा शर्मा, डॉ. नीलाक्षी चौहान और योगेश चौहान प्रमुख रूप से शामिल थे।

यह बैठक हिमाचल प्रदेश में पोषण और खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के साझा प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के समन्वित प्रयास आने वाले समय में राज्य के बच्चों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के स्वास्थ्य स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे।