हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में अगले सात दिन भारी, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

उत्तर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अपने सबसे सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुका है और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के लिए अगले कुछ दिनों को अत्यधिक संवेदनशील बताया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है, जबकि मैदानी इलाकों में तेज बारिश, आंधी और जलभराव जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले सात दिन पूरे क्षेत्र के लिए सतर्कता और सावधानी की परीक्षा साबित हो सकते हैं।

आईएमडी के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे और मजबूत हो रहा है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत में नमी लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते हिमालयी राज्यों सहित पंजाब और हरियाणा में भी व्यापक वर्षा की संभावना बनी हुई है।

हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक चिंता भूस्खलन, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ को लेकर जताई गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण पर्वतीय ढलानों पर मिट्टी ढीली पड़ने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के अवरुद्ध होने, ग्रामीण संपर्क मार्ग प्रभावित होने तथा नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि लगातार वर्षा का सिलसिला जारी रहता है तो कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पंजाब में मानसून के सक्रिय होने से कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण यह वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभकारी मानी जा रही है, लेकिन अत्यधिक बारिश जलभराव और फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है।

राज्य के निचले इलाकों और शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन ने स्थानीय निकायों को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।

हरियाणा में भी आगामी दिनों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इससे पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।

मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कृषि कार्यों की योजना बनाएं। खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों और बिजली गिरने की आशंका वाले समय में बाहर निकलने से बचने की भी अपील की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय मानसून कई सक्रिय मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव में है, जिसके कारण मौसम तेजी से बदल सकता है। यही वजह है कि पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखने और प्रशासन द्वारा जारी परामर्श का पालन करना बेहद आवश्यक है।

प्रशासन ने तीनों राज्यों के लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से परहेज करें। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को मौसम और सड़क की स्थिति की पुष्टि करने के बाद ही सफर शुरू करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग का आकलन है कि अगले सात दिनों तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। ऐसे में जहां एक ओर यह वर्षा जल संसाधनों और कृषि के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी जोखिमों को देखते हुए सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय होगी।