आम आदमी पार्टी (AAP) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने दिल्ली शराब नीति मामले में आए अदालती फैसले को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेता सुरजीत सिंह ठाकुर ने जारी एक प्रेस बयान में कहा कि इस फैसले ने कथित तौर पर बनाई गई “राजनीतिक साजिश” को बेनकाब कर दिया है और यह साबित हो गया है कि मामले में कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं था।
AAP के अनुसार, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस प्रकरण में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष के दावों को स्वीकार नहीं किया। पार्टी का कहना है कि अदालत ने यह माना कि न तो कोई आपराधिक साजिश सिद्ध हुई और न ही ऐसा कोई प्रमाण सामने आया, जिससे प्रथम दृष्टया अपराध बनता हो।
सुरजीत सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा के राजनीतिक दबाव में केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से आम आदमी पार्टी के नेताओं को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में उलझाया गया और उन्हें जेल में रखा गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताया और कहा कि इस पूरे प्रकरण का उद्देश्य AAP को राजनीतिक रूप से कमजोर करना था।
प्रेस बयान में यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने न केवल नेताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित किया, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी का दावा है कि लंबे समय तक चले इस मामले में अब अदालत के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि आरोप प्रमाणहीन थे।
AAP हिमाचल प्रदेश ने इस पूरे घटनाक्रम को “न्याय की जीत” बताते हुए मांग की है कि जिन अधिकारियों ने कथित तौर पर बिना पर्याप्त साक्ष्यों के कार्रवाई की, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग रखी कि इस मामले से प्रभावित नेताओं को न्यायिक और नैतिक क्षति के लिए उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
पार्टी नेतृत्व ने भाजपा और केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किस स्तर तक हुआ। साथ ही, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है।
AAP ने हिमाचल प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे इस मुद्दे को केवल एक कानूनी मामला न मानकर लोकतंत्र और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े बड़े सवाल के रूप में देखें। पार्टी के अनुसार, यह प्रकरण देश में राजनीति, जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के रिश्ते पर गंभीर बहस की आवश्यकता को सामने लाता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली शराब नीति मामला राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है और इसका प्रभाव केवल दिल्ली तक सीमित न रहकर देशव्यापी राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रहा है।






