हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब सुखविंदर सिंह सुक्खू बजट भाषण शुरू करने के लिए खड़े हुए। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने अचानक वेल में आकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।
विपक्ष ने “विधानसभा भंग करो”, “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। नारेबाजी के बीच माहौल इतना शोरगुल वाला हो गया कि मुख्यमंत्री का भाषण सुन पाना मुश्किल हो गया। इस दौरान कुछ विधायकों ने तीखे और विवादित नारे भी लगाए, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
कुलदीप सिंह पठानिया ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई बार हस्तक्षेप किया और विपक्ष से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने विधायकों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह भी किया, लेकिन विपक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा। हालांकि एक बार विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे, लेकिन कुछ ही देर बाद दोबारा वेल में आकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार लगातार कर्ज लेकर प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है। भाजपा विधायकों का कहना है कि सरकार की वित्तीय नीतियां अस्थिर हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही विपक्ष ने सरकार पर खनन माफिया को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया और कहा कि अवैध खनन पर लगाम लगाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी सदन में जोर-शोर से उठाया गया। हाल ही में ड्रग्स से जुड़े एक मामले में पुलिस के चार कर्मियों की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विपक्ष का कहना है कि जब कानून लागू करने वाले ही इस तरह के मामलों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन आरोपों के बीच मुख्यमंत्री ने सदन में अपना भाषण जारी रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार हो रहे हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पाई। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि महत्वपूर्ण बजट सत्र के दौरान इस तरह का व्यवधान लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि बजट सत्र के आगामी दिन भी काफी गर्म रहने वाले हैं। विपक्ष जहां सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं सरकार अपनी नीतियों और फैसलों का बचाव करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।






