हिमाचल में नशे पर सियासत तेज: जयराम ठाकुर के गंभीर आरोप, सरकार पर फोन टैपिंग और लापरवाही का निशाना

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में विधायकों की जासूसी और फोन टैपिंग जैसी गतिविधियां हो रही हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बेहद चिंताजनक हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि यह मामला न केवल राजनीतिक रूप से गंभीर है, बल्कि शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

इसी के साथ उन्होंने प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर भी सुक्खू सरकार को आड़े हाथों लिया। ठाकुर ने दावा किया कि नशे पर लगाम लगाने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स के कुछ जवान ही इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाए गए हैं। उनके अनुसार, चार कर्मियों को एलएसडी जैसे खतरनाक नशे की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया है, जो कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि जब नशा रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले ही इसमें शामिल हो जाएं, तो यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। उनके शब्दों में, जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो समाज, खासकर युवा पीढ़ी की सुरक्षा पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाता है।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विधानसभा के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इसे गंभीरता से लेने के बजाय हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने इसे सरकार की असंवेदनशीलता करार दिया और कहा कि इससे साफ झलकता है कि राज्य सरकार नशे जैसी गंभीर समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।

जयराम ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश में नशे का जाल शहरों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल बड़े आयोजनों और प्रचार गतिविधियों तक सीमित है।

उन्होंने सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे अभियान की बजाय इवेंट मैनेजमेंट बना दिया गया है। उनके अनुसार, स्कूली बच्चों को लंबे समय तक कार्यक्रमों में शामिल कर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कई जगह युवा नशे की ओवरडोज का शिकार हो रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण करने में विफल रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई के कारण नशा तस्करों पर प्रभावी नियंत्रण किया गया था, जिससे वे इस धंधे को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए थे।

जयराम ठाकुर के इन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है, खासकर जब नशा और कानून-व्यवस्था जैसे विषय जनता से सीधे जुड़े हुए हैं।