टांडा मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी से बढ़ी चिंता, मरीजों को हो सकती हैं कठिनाइयाँ

धर्मशाला।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा के हृदय रोग विभाग (कार्डियोलॉजी) में विशेषज्ञ चिकित्सक के स्थानांतरण के बाद क्षेत्र के हृदय रोगियों और उनके परिजनों में चिंता का माहौल है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि विशेषज्ञ चिकित्सक के स्थान पर शीघ्र नई नियुक्ति नहीं की गई, तो गंभीर हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों को उपचार संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

टांडा मेडिकल कॉलेज प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है और कांगड़ा सहित चंबा, ऊना, हमीरपुर, मंडी तथा आसपास के कई जिलों के मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से हृदय रोग विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज परामर्श, जांच और उपचार के लिए आते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोगों में समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। हार्ट अटैक, हृदय गति में अनियमितता, ब्लॉकेज और अन्य गंभीर कार्डियक आपात स्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है। ऐसे में विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार की सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद अधिकांश मरीजों के लिए वहां का खर्च वहन करना आसान नहीं होता।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी चिकित्सक के स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति के बाद वैकल्पिक व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रहे और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे तृतीयक स्तर (टर्शियरी केयर) के संस्थानों में कार्डियोलॉजी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं का निर्बाध संचालन प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए आवश्यक है। इसलिए विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

मरीजों और सामाजिक संगठनों ने भी अपेक्षा जताई है कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति का आकलन कर आवश्यक व्यवस्थाएं करेगा, ताकि हृदय रोगियों को जांच, परामर्श और आपातकालीन उपचार के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में मजबूत और निरंतर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध रहना न केवल मरीजों के हित में है, बल्कि इससे आम जनता का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होता है।